Petrol Diesel prices: पेट्रोल और डीजल के दामों में सोमवार को एक बार फिर भारी बढ़ोतरी की गई है। सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये के कारण रिटेल फ्यूल रेट्स को बढ़ा दिया है। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल का दाम 100 रुपये के पार पहुंच गया है, जबकि आर्थिक राजधानी मुंबई में यह 111 रुपये के पार निकल गया है। पिछले 10 दिनों के भीतर पेट्रोल-डीजल के दामों में की गई यह चौथी बड़ी बढ़ोतरी है।
इंडस्ट्री ऑफिशियल्स के मुताबिक एक लंबे फ्रीज के बाद जब से डेली रिवीजन दोबारा शुरू हुई है, तब से लेकर अब तक यह चौथी बढ़ोतरी है। 15 मई से लेकर अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी हो चुकी है। सोमवार से पहले 15 मई, 19 मई और 23 मई को भी कीमतें बढ़ाई गई थीं। 15 मई को पहली बार में ही पेट्रोल-डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए थे।
मेट्रो शहरों में पेट्रोल-डीजल के नए दाम
राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर का बड़ा उछाल आया है। यह यहां पेट्रोल की कीमत पहली बार 100 रुपये को पारकर 102.12 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है। डीजल का दाम 2.71 रुपये बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में पेट्रोल की कीमतें चढ़कर 111.21 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई हैं, जबकि डीजल के रेट्स बढ़कर 97.83 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं। इस ताजा रिवीजन के बाद कोलकाता में पेट्रोल का दाम 113.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल का दाम 99.82 रुपये प्रति लीटर तक जा पहुंचा है। चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 107.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 99.55 रुपये प्रति लीटर रिकॉर्ड की गई है।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम? तेल कंपनियों ने बताई वजह
ऑफिशियल्स का कहना है कि इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों और रुपये के डेप्रिसिएशन के कारण बढ़ी इम्पोर्ट कॉस्ट इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह है। हमारी सहयोगी वेबसाइट मनी कंट्रोल इंग्लिश की रिपोर्ट के मुताबिक ओएनजीसी और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव्स ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और अंडर-रिकवरी के चलते तेल कंपनियों पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। कंपनी एग्जीक्यूटिव्स ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी वेस्ट एशिया में लंबे समय से चल रहे जियोपॉलिटिकल टेंशन (भू-राजनीतिक तनाव), वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अंडर-रिकवरी के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर बढ़ते दबाव को दर्शाती है।
आपको बता दें कि वेस्ट एशिया में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के जरिए होने वाले शिपमेंट में रुकावट के कारण ग्लोबल ऑयल मार्केट लगातार अस्थिर बना हुआ है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऑयल ट्रांजिट रूट (तेल परिवहन मार्ग) माना जाता है।
इतनी बढ़ोतरी के बाद भी कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान
सरकारी अधिकारियों ने पहले ही साफ कर दिया था कि पिछली कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अभी भी भारी नुकसान का सामना कर रही हैं। पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया था कि 15 मई की बढ़ोतरी से कंपनियों के घाटे में करीब 25 प्रतिशत की कमी जरूर आई थी, लेकिन इसके बावजूद सरकारी फर्में अभी भी हर दिन लगभग 750 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के एस्टीमेट्स के मुताबिक, इन सभी संशोधनों के बाद भी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 13 रुपये प्रति लीटर का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि पिछले कुछ हफ्तों में CNG की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। दिल्ली में बीती 23 मई को ही सीएनजी के दाम 1 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए थे। इसके साथ ही 15 मई से लेकर अब तक सीएनजी की कीमतों में कुल 4 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हो चुकी है।
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