पेट्रोल-डीजल के नहीं बढ़ेंगे दाम, पेट्रोलियम मंत्रालय ने किया साफ; कहा- ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं

पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत सरकार और ऑयल PSUs ने तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाली भारी बढ़ोतरी से भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए स्थिति स्पष्ट की है

अपडेटेड Apr 23, 2026 पर 12:05 PM
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भारत में पिछले 4 वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।

भारत में चल रहे विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसा संकेत घरेलू ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने दिया है। लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के किसी भी प्रस्ताव पर ​विचार नहीं किया जा रहा है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की खबर भ्रामक है।

पोस्ट में लिखा है, 'कुछ खबरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की बात कही जा रही है। इस संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि सरकार ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है। इस तरह की खबरें नागरिकों के बीच डर और घबराहट पैदा करने के मकसद से फैलाई जा रही हैं। ये शरारतपूर्ण और गुमराह करने वाली हैं।'

पोस्ट में आगे कहा गया है, 'भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जहां पिछले 4 वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। भारत सरकार और ऑयल PSUs ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाली भारी बढ़ोतरी से भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं।'


क्या कहना है कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का

CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, कोटक का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण रिफाइनरों पर दबाव बढ़ रहा है। इसके कारण फ्यूल की कीमतों में ₹25-₹28 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद देश में अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इससे रिफाइनरों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है, जिसका अनुमानित अतिरिक्त प्रभाव लगभग ₹270 अरब प्रति माह है। हालांकि सरकार ने उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में ₹10 प्रति लीटर की कटौती की है और निर्यात पर 'विंडफॉल टैक्स' (अतिरिक्त लाभ पर लगने वाला टैक्स) को फिर से लागू किया है। लेकिन ये उपाय केवल आंशिक राहत ही दे पाते हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के कारण भारत का आयात बिल काफी बढ़ गया है। इस साल मार्च और अप्रैल में भारत की ओर से कच्चे तेल के आयात की मात्रा में 13–15% की गिरावट देखी गई। इसके बावजूद कच्चे तेल के आयात बिल में अनुमानित तौर पर प्रतिदिन 19–21 करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी हुई है।

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