Windfall Tax में भारी कटौती, तेल कंपनियों को मिली इतनी मिली राहत

Windfall Tax: तेल कंपनियों को बड़ी राहत मिली है। विंडफाल टैक्स में इस बार भारी कटौती की गई है। इससे जुड़ा नोटिफिकेशन 18 दिसंबर को ही जारी हो चुका है। नई दरें आज 19 दिसंबर से ही प्रभावी हो चुकी हैं यानी आज से जो कच्चा तेल बिकेगा और डीजल निर्यात होगा, उस पर कम रेट से टैक्स लगेगा। हालांकि एटीएफ पर एक बार फिर इसे लगा दिया गया है

अपडेटेड Dec 19, 2023 पर 8:31 AM
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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते भारत में सबसे पहले जुलाई 2022 में विंडफाल टैक्स लगाया गया था।

Windfall Tax: तेल कंपनियों को बड़ी राहत मिली है। सरकार ने घरेलू कच्चे तेल और डीजल के निर्यात पर विंडफाल प्रॉफिट टैक्स में कटौती कर दिया है। इससे जुड़ा नोटिफिकेशन 18 दिसंबर को ही जारी हो चुका है। नई दरें आज 19 दिसंबर से ही प्रभावी हो चुकी हैं यानी आज से जो कच्चा तेल बिकेगा और डीजल निर्यात होगा, उस पर कम रेट से टैक्स लगेगा। अब आज से घरेलू स्तर पर निकाले गए कच्चे तेल पर स्पेशल एडीशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) प्रति टन 1300 रुपये ही रह गई है। पहले यह 5000 रुपये था। इसके अलावा डीजल निर्यात पर भी इसे 1 रुपये से घटाकर प्रति लीटर 50 पैसे कर दिया गया है। इस प्रकार विंडफाल टैक्स में इस बार भारी कटौती की गई है।

ATF के मामले में लगा झटका

सरकार ने घरेलू कच्चे तेल और डीजल निर्यात पर विंडफाल प्रॉफिट टैक्स पर भारी कटौती कर दी है लेकिन हवाई जहाज में इस्तेमाल होने वाले ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के मामले में तगड़ा झटका दिया है। एटीएफ निर्यात पर लेवी को बढ़ाया गया है। पहले इस पर कोई लेवी नहीं थी लेकिन अब इस पर प्रति लीटर 1 रुपये की लेवी है। यह चार्ज भी आज से प्रभावी हो गया है। हालांकि पेट्रोल पर अभी भी कोई विंडफाल प्रॉफिट टैक्स नहीं लगाया गया है।


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क्या है Windfall Tax?

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते भारत में सबसे पहले जुलाई 2022 में विंडफाल टैक्स लगाया गया था। यह टैक्स तब लगाया जाता है जब किसी इंडस्ट्री को अप्रत्याशित रूप से यानी सामान्य से अधिक मुनाफा होता है और इसकी वजह कोई असामान्य घटना होती है जैसे कि युद्ध के समय तेल के भाव बढ़ जाएं तो इससे बढ़े मुनाफे पर यह टैक्स लगता है। घरेलू कच्चे तेल की बात करें तो विंडफाल टैक्स तब लगाया जाता है जब वैश्विक बेंचमार्क की दरें 75 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो जाती हैं। वहीं डीजल, एटीएफ और पेट्रोल के निर्यात के लिए यह लेवी तब लागू होती है जब मार्जिन 20 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो जाता है।

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