सरकार ने अब तक कुल 5.62 लाख टन तुअर की खरीद की है। सरकार ने कुल सरकारी लक्ष्य की 42.37% खरीदारी की है। किसानों को अच्छी कीमत देने और बाजार में स्थिरता के लिए खरीदारी की है। सरकारी खरीदारी से तुअर दाल की उपलब्धता बढ़ेगी। अलग-अलग राज्यों में खरीद केंद्र बनाए गए हैं। किसानों से सीधे तुअर दाल की खरीदारी की जा रही है। इससे बिचौलियों की भूमिका पर लगाम लगाई जा रही है।
बता दें कि खरीद अभियान जून के पहले सप्ताह तक चलेगा। IPGA ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया है। वहीं इंडियन पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन(IPGA) ने किसानों के हित में एक सकारात्मक कदम बताया है। सरकार जल्द तुअर दाल के बचे हुए कोटे की खरीदारी करेगी। तुअर दाल का बचा हुआ कोटा फिलहाल 57.63% है
2024-25 के रबी सीजन के लिए 13 लाख टन का सरकारी कोटा है। फिलहाल तुअर दाल का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य के नीचे है।
इस बीच दिल्ली ग्रेन एसोसिएशन की दालों के स्टॉक डिस्क्लोजर आदेश वापस लेने की अपील की है। दाल के भाव MSP से नीचे होने के चलते किसानों को नुकसान हो रहा है। दालों की वीकली स्टॉक डिस्क्लोजर आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की है। स्टॉक डिस्क्लोजर आदेश वापस लेने की अपील की है।
सरकार को तुअर इंपोर्ट पर लगाम लगानी चाहिए
DGMA के वीपी गौरव गुप्ता का कहना है कि सरकार को तुअर इंपोर्ट पर लगाम लगानी चाहिए। MSP से ज्यादा कीमत पर इंपोर्ट होनी चाहिए। येलो पीज की देश में 15 लाख टन की खपत है। सरकार ने यलो पीज 30 लाख टन इंपोर्ट कर चुकी है।
Waseda Global Asia के सुमित गुप्ता का कहना है कि गेहूं की सरकारी खरीद बढ़ाने का स्कोप है। गेहूं की सरकारी खरीद बेहतर है। महंगाई पर सरकार लगाम लगाने में सफल रही। इस साल बेहतर मॉनसून से दालों में उतार-चढ़ाव ज्यादा नहीं रहेगी।
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