केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बायोस्टिमुलेंट (Biostimulant) दवाओं की अंधाधुंध बिक्री पर रोक लगा दी है। उनका कहना है कि पहले इन दवाएं की वैज्ञानिक जांच होगी और किसानों के लिए फायदेमंद होने पर ही बिक्री की जाएगी। कृषि मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि जो कंपनियां बिना नियम-कायदे के बायोस्टिमुलेंट बेच रही हैं, उन पर सख्त कार्रवाई होगी और अब केवल उन्हीं उत्पादों को बाजार में बेचने की इजाजत मिलेगी, जो वैज्ञानिक जांच पर पूरी तरह खरे उतरते हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने कृषि मंत्रालय और ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) के अधिकारियों के साथ बैठक में दो टूक कहा कि किसानों के साथ किसी भी हाल में धोखा नहीं होने देंगे। जिन कंपनियों या उत्पादों ने वैज्ञानिक गुणवत्ता पास नहीं की है, उनकी बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर उत्पाद की पूरी तरह से जांच हो, ताकि देश के भोले-भाले किसानों के साथ गड़बड़ी न हो पाए।
मंत्री ने बताया कि हाल ही में देश भर में जब वह गांवों के दौरे पर गए, तब कई किसानों ने नकली खाद, बीज और घटिया बायोस्टिमुलेंट की शिकायत की थी। शिकायतों के आधार पर अब बायोस्टिमुलेंट के लिए कड़े नियम लागू होंगे। आईसीएआर से पास हुए बायोस्टिमुलेंट ही किसानों तक पहुंचेंगे। मंत्री ने अफसरों से पूछा कि ऐसे उत्पादों से किसानों की उत्पादकता वाकई बढ़ी है या नहीं—अगर इसका फायदा नहीं तो बेचने की अनुमति नहीं मिलेगी।
अब हर कंपनी को अपने उत्पाद का फील्ड ट्रायल डेटा, गुणवत्ता प्रमाण और अन्य जरूरी जानकारी देना जरूरी होगा। जो असली-नकली में फर्क नहीं कर पा रही या फर्जीवाड़ा कर रही हैं, उनके खिलाफ लाइसेंस रद्द करने और FIR के निर्देश भी दिए गए हैं।
शिवराज सिंह ने यह भी जोड़ा कि हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी देश के छोटे किसानों की भलाई है, न कि कंपनियों का फायदा। उन्होंने अफसरों को चेताया कि नियम-कायदे और एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) सख्ती से लागू करें ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी न हो सके।