Silver ने 2024 में दिया 32 फीसदी रिटर्न, क्या अभी निवेश का मौका है?

सिल्वर की डिमांड मजबूत बनी हुई है। यह लगातार चौथा साल है जब इसकी सप्लाई इसकी डिमांड के मुकाबले कम है। इस वजह से इसकी कीमतें लगातार चढ़ रही है। इस साल इसका भाव 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। 2024 में यह सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला मेटल बन गया

अपडेटेड Nov 25, 2024 पर 1:39 PM
2024 में इंडिया में सिल्वर का इंपोर्ट करीब 8,000 टन पहुंच जाने का अनुमान है।

इस साल सिल्वर की कीमतों ने ऊंचाई का रिकॉर्ड बनाया है। 2024 में चांदी ने 32 फीसदी रिटर्न दिया है। यह 2024 में मेटल कैटेगरी में सबसे ज्यादा रिटर्न है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी यह साल खत्म नहीं हुआ है। साल खत्म होने तक सिल्वर का रिटर्न बढ़ सकता है। सिल्वर में तेजी की सबसे बड़ी वजह यह है कि इसकी सप्लाई डिमांड से कम है। सिल्वर का इस्तेमाल कई तरह की इंडस्ट्री में होता है। यह लगातार चौथा साल है, जब चांदी का उत्पादन उसकी डिमांड से कम है।

60 फीसदी इंडस्ट्री की तरफ से

सिल्वर (Silver) की इंडस्ट्रियल डिमांड 2023 में 11 फीसदी बढ़ी थी। इस साल यह 9 फीसदी बढ़कर करीब 71.1 करोड़ औंस पहुंच गई। सिल्वर की 60 फीसदी डिमांड इंडस्ट्री की तरफ से आती है। इसका इस्तेमाल सोलर सेल्स बनाने में भी होता है। सोलर सेल का इस्तेमाल सूरज की रोशनी का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा सर्किट बोर्ड, मिरर, कैमरे, मोबाइल फोन, टैबलेट्स और ऑटोमोबाइल में सिल्वर का इस्तेमाल होता है। डेटा सेंटर्स भी चांदी का इस्तेमाल होता है।


2024 में 8,000 टन इंपोर्ट का अनुमान

सिल्वर में एंटीबैक्टिरियल प्रॉपर्टीज होती है। इस वजह से इसका इस्तेमाल मेडिकल ट्यूब, कैथेटर्स, हियरिंग ऐड्स, डेंटल फिलिंग और वाटर फिल्टरेशन सिस्टम में होता है। डिमांड बढ़ने से इसकी कीमतें बढ़ रही हैं। इंडिया सिल्वर के बड़े आयातकों में से एक है। 2024 में इंडिया में सिल्वर का इंपोर्ट करीब 8,000 टन पहुंच जाने का अनुमान है। इसकी बड़ी वजह यह है कि इंडिया में शादी-विवाह में चांदी का काफी इस्तेमाल होता है। सिल्वर ज्वैलरी, कॉइन, बार्स और दूसरी चीजें लोग शादी में उपहार में देते हैं। नवंबर 2024 से जनवरी 2025 तक इंडिया में करीब 48 लाख शादियां होने का अनुमान है। इस दौरान सिल्वर की काफी ज्यादा मांग रहेगी।

सिल्वर ईटीएफ में भी बढ़ रही दिलचस्पी

निवेशकों की सिल्वर ईटीएफ में भी दिलचस्पी बढ़ रही है। 12 म्यूचुअल फंड कंपनियों के सिल्वर ईटीएफ मार्केट में मौजूद हैं। इनका एसेट अंडर मैनेजमेंट 12,000 करोड़ रुपये है। एक साल पहले यह 2,845 करोड़ रुपये था। सिल्वर ईटीएफ में SIP के जरिए भी निवेश किया जा सकता है। सिल्वर 1980 में 49,50 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया था। तब हंट ब्रदर्स ने फिजिकल और फ्यूचर्स मार्केट में सिल्वर की जबर्दस्त खरीदारी की थी।

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क्या आगे भी जारी रहेगी तेजी?

2024 में सिल्वर में बड़ी तेजी देखने को मिली। इसका भाव 12 साल की उंचाई पर पहुंच गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिल्वर में अगले 2-3 साल में तेजी का ट्रेंड जारी रहेगा। 2025 में इसका भाव 36-40 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। इससे इंडिया में इसका भाव 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम को पार कर जाएगा।

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