Spices in India: वेस्ट एशिया संकट के बीच मसालों की कीमतों में तेजी देखने को मिली। कम आवक ने मसालों के दाम बढ़ाए। मिर्च की आवक पिछले साल से 50% कम हुई। भारत लाल मिर्च का सबसे बड़ा उत्पादक है। धनिये की आवक 1.70 करोड़ बोरी रहने की उम्मीद है। मखाना ₹800-1400 के दायरे में बिक रहा है। किशमिश की कीमतों में 10% बढ़ोतरी की उम्मीद है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, इस संकट से पश्चिम एशिया को होने वाला भारत का करीब 11.8 बिलियन डॉलर का कृषि और मसाला निर्यात जोखिम में पड़ गया है। ऐसे में आगे मसालों की कीमतें कैसी रह सकती है आइए जानते है क्या कहते है बाजार जानकार।
अगस्त-सितंबर तक भाव और चढ़ सकते
APMC वाशी के वीपी अशोक दतानी का कहना है कि पिछले साल से ट्रेड 50% कम हो गया है। सरकार की नीतियों का भी कारोबार पर असर पड़ा। ।सरकार बिचौलियों को हटाना चाहती है। बड़ी कंपनियों को ट्रेड लाइसेंस मिल रहा है। कंपनियां सीधे किसानों से खरीद कर रही हैं। छोटे कारोबारी कंपनियों से मुकाबला नहीं कर सकते है। इंडस्ट्री ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारत मसालों का सबसे बड़ा प्रोड्यूसर है। भारत में मिर्च का उत्पादन दुनिया में सबसे ज्यादा है। भारत मिर्च का दुनिया का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है। बीते कुछ दिनों में कारोबार में थोड़ी परेशानी आई। किसान कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं। जानकारी के अभाव में ज्यादा इस्तेमाल नुकसानदायक है। एक्सपोर्ट में इंटरनेशनल मानकों का पालन जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि यूरोप और अमेरिका में नीतियां काफी सख्त हैं। US-ईरान युद्ध का भी कारोबार पर असर देखने को मिला।
युद्ध के कारण एक्सपोर्ट लागत काफी बढ़ी। शिपमेंट और कंटेनर मिलने में परेशानी हो रही है। इस साल मिर्च का उत्पादन पिछले साल से कम है। दक्षिण भारत में मिर्च का उत्पादन पिछले साल से कम है। मध्य प्रदेश में मिर्च का उत्पादन लगातार गिरा है। पहले MP में 60 लाख बोरी मिर्च का उत्पादन होता था। अब MP में उत्पादन घटकर 6 लाख बोरी रह गया।
इस साल मिर्च की फसल सिर्फ 50% रही। पिछले साल से दाम दोगुने हो चुके हैं। स्टॉक भी पिछले साल से 50% कम है। दाम बढ़ने से कुछ किसानों को अच्छे भाव मिले। किसानों के पास मिर्च का स्टॉक बहुत कम है। बड़ी मसाला कंपनियों के पास अच्छा स्टॉक है। मौजूदा स्टॉक नई आवक तक रहेगा, कहना मुश्किल है। आगे भी मिर्च की कीमतों में तेजी की उम्मीद है। अगस्त-सितंबर तक भाव और चढ़ सकते हैं।
धनिये में आगे 10-15 की और तेजी की उम्मीद
धनिया ट्रेडर किरीट ने कहा कि 2024-25 में धनिया का 70 लाख बोरी का फॉरवर्ड स्टॉक था। 2025-26 में धनिया की 1.10 करोड़ बोरियों की आवक हुई। इस साल 1.70 करोड़ बोरियों की आवक की उम्मीद थी। ज्यादा सप्लाई की उम्मीद से ट्रेडर्स ने माल जल्दी खाली किया। नई आवक में क्वालिटी को लेकर चिंता रही। कैरी फॉरवर्ड स्टॉक समय से पहले बाजार से निकल गया।
उन्होंने कहा कि 4-6 महीने तक बाजार में तेजी की उम्मीद नहीं थी। अच्छी क्वालिटी का स्टॉक दीवाली से पहले नहीं मिला। पिछले अप्रैल से इस अप्रैल तक भाव दोगुने हो चुके हैं। अच्छी क्वालिटी वाले माल की किल्लत से तेजी आई। पिछले साल अच्छी क्वालिटी का माल कम भाव पर बिका। सप्लाई में गिरावट से कीमतों में तेजी आई है। आगे भी धनिये की कीमतों में गिरावट की उम्मीद नहीं। सितंबर अंत तक कीमतों में नरमी की उम्मीद नहीं। दाम ज्यादा रहे तो किसान बुआई बढ़ा सकते हैं। देश में विदेशों से भी धनिया इंपोर्ट हो रहा है। इंपोर्टेड धनिये के भाव भी पिछले साल से दोगुने हुए।
उन्होंने आगे कहा कि धनिये के दाम चढ़ने से सभी को मुनाफा हुआ। ट्रेडर्स को कमीशन भी अच्छा मिला। धनिये में अक्टूबर तक तेजी जारी रहने की उम्मीद है। NCDEX के कदमों पर धनिये की चाल निर्भर करेगी। जीरे जैसा हाल धनिये में भी देखने को मिल सकता है। धनिये में आगे 10-15 की और तेजी की उम्मीद है।
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