Sugar & Coffee Prices Hike: दुनिया भर में मौसम के बदलते मिजाज के कारण कमोडिटी बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। वैश्विक स्तर पर सप्लाई घटने की आशंकाओं के चलते चीनी और कॉफी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। भारत से लेकर ब्राजील तक कम बारिश और फसल की कटाई में देरी ने वैश्विक बाजार में सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
आइए समझते हैं कि चीनी और कॉफी की कीमतों में आई इस अचानक तेजी के पीछे मुख्य कारण क्या हैं और भारत के लिए इसके क्या मायने हैं।
चीनी की कीमतों में उबाल: 6 हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंचे दाम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के वायदा भाव इस हफ्ते 6.5% की भारी तेजी के साथ छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। इसके पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:
भारत में 12 साल का सबसे सूखा जून: भारत में गन्ने की खेती वाले इलाकों में इस साल जून महीने में पिछले 12 वर्षों की सबसे कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में सामान्य के मुकाबले 38% कम बारिश दर्ज हुई है, जिसने गन्ना उत्पादन को लेकर चिंताओं को बढ़ा दिया है।
ब्राजील में कटाई में देरी और इथेनॉल की मांग: दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश ब्राजील में लगातार हो रही बारिश के कारण गन्ने की कटाई का काम काफी धीमा हो गया है। इसके अलावा, वहां कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण गन्ने से चीनी बनाने के बजाय इथेनॉल उत्पादन में इसका इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है, जिससे चीनी की वैश्विक सप्लाई घट गई है।
भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को काबू में रखने और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने चीनी के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को 30 सितंबर तक के लिए आगे बढ़ा दिया है।
कॉफी भी हुई कड़वी, अप्रैल के बाद महंगे हुए दाम
सिर्फ चीनी ही नहीं, सुबह की शुरुआत करने वाली आपकी कॉफी भी अब महंगी हो गई है। कॉफी के वैश्विक दाम अप्रैल के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कॉफी का स्टॉक कई वर्षों के सबसे निचले स्तर पर चल रहा है।
ब्राजील में हो रही बेमौसम भारी बारिश ने कॉफी बीन्स की कटाई और सुखाने की प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस वजह से वैश्विक बाजारों में नई सप्लाई आने में देरी हो रही है।
वैसे वैश्विक स्तर पर सप्लाई की तंगी का फायदा भारतीय कॉफी निर्यातकों को मिल रहा है। अप्रैल-मई 2026 के दौरान भारत से होने वाले कॉफी निर्यात में सालाना आधार पर 20% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आम जनता और कंपनियों पर क्या होगा असर?
चीनी और कॉफी के महंगे होने से सीधे तौर पर एफएमसीजी कंपनियों की इनपुट कॉस्ट बढ़ जाएगी। बिस्कुट, चॉकलेट, सॉफ्ट ड्रिंक्स और बेकरी प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियों को आने वाले दिनों में अपने उत्पाद महंगे करने पड़ सकते हैं, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।