Wheat Stock Limit: केंद्र सरकार ने सरकार ने गेहूं की स्टॉक लिमिट हटाई है। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने 27 मई 2025 को जारी किए गए 'स्टॉक लिमिट' आदेश को वापस ले लिया है। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि बाजार में गेहूं की उपलब्धता अब पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर है और कीमतों में भी गिरावट का रुख देखा जा रहा है।
बता दें कि ट्रेडर्स, होलसेलर्स, रिटेलर्स पर लिमिट लगी थी। दरअसल, दाम गिरने, सप्लाई बढ़ने से फैसला लिया। गेहूं की कीमतों में 3% की गिरावट आई। मई 2025 में सरकार स्टॉक लिमिट लगाई थी।
जमाखोरी रोकने के लिए लिया गया था फैसला। इस साल गेहूं का स्टॉक पिछले साल से ज्यादा रहा। मार्केट पार्टिसिपेंट्स को हर हफ्ते स्टॉक बताना होगा। हर शुक्रवार को स्टॉक की जानकारी देनी होगी। फूड स्टॉक पोर्टल पर जानकारी देनी होगी । अभी व्यापारियों के पास 81 लाख टन का स्टॉक आया। पिछले साल से स्टॉक 30 लाख का टन ज्यादा है।
इस साल रबी सीजन के दौरान गेहूं की बुआई के क्षेत्र (रकबा) में भी शानदार बढ़त देखी गई है। पिछले साल गेहूं की खेती 328.04 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जो इस साल बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर हो गई है। एमएसपी (MSP) की गारंटी और सरकारी खरीद की बेहतर संभावनाओं के कारण किसानों ने गेहूं की खेती को प्राथमिकता दी है। पिछले साल से 6 लाख हेक्टर ज्यादा बुवाई हुई। 5 लाख मीट्रिक टन एक्सपोर्ट को मंजूरी मिल चुकी है। पिछले महीने ही सरकार ने एक्सपोर्ट की मंजूरी दी थी।
गेहूं के एक्सपोर्ट की समीक्षा जून के मध्य तक कर सकती है
WPPS चेयरमैन अजय गोयल ने कहा कि सरकार ने बाजार पर काफी अंकुश लगा रखा है। सरकार लगातार देख रही है कि बाजार में कितना स्टॉक है। लिमिट लगने का बाजार पर निगेटिव असर पड़ता है। हो सकता है सरकार अप्रैल में लिमिट लगा दे। सरकार की खरीद अच्छी रही तो सभी कुछ को मंजूरी मिल जाए।
प्रोडक्ट एक्सपोर्ट पर ऐसे नियम लगाए जिनका पालन संभव नहीं है। इतनी नियम कायदे से एक्सपोर्ट को मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए थी। सरकार चाहती है कि एक्सपोर्ट हो तो नियम आसान बनाए जाए।
उन्होंने आगे कहा कि देश में गेहूं की फसल काफी अच्छी है। सरकार गेहूं के एक्सपोर्ट की समीक्षा जून के मध्य तक कर सकती है। उन्होंने आगे कहा कि गेहूं के प्रोडक्ट की मांग पिछले एक साल में गिरी है। डिमांड में काफी गिरावट आई है। कंज्मशन जरुर बढा हो लेकिन इंडस्ट्रियल डिमांड ग्रोथ में गिरावट आई।