ZEE एंटरटेनमेंट और डिश टीवी के बाद सुभाष चंद्रा परिवार को ZEE लर्न और ZEE मीडिया कॉरपोरेशन में भी शेयरधारकों की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। सूत्रों के मुताबिक इन दोनों कंपनियों की जल्द ही जनरल बॉडी मीटिंग बुलाई जानी है।
इससे पहले, पिछले सप्ताह ZEE एंटरटेनमेंट में शेयरधारकों की एक्टिविज्म देखने को मिली। कंपनी के प्रमुख शेयरधारकों ने प्रमोटरों और पुनीत गोयनका की अगुआई वाले वाले मौजूदा मैनेजमेंट को हटाने को लेकर खुले तौर पर मांग की। इसके अलावा, डिश टीवी को भी इस महीने की शुरुआत में इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा था।
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ZEE एंटरटेनमेंट की परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह एक अनूठी कंपनी है, जिसमें प्रमोटरों के पास सिर्फ 3.99 फीसदी हिस्सेदारी है, फिर भी पूरी कंपनी को वही पूरी तरह से नियंत्रित करते हैं।
कंपनी के आंतरिक सूत्रों के अनुसार निवेशक चाहते हैं कि भले ही सुभाष चंद्रा का एस्सेल समूह इनमें सबसे बड़ा शेयरधारक है, लेकिन प्रमोटर ZEE लर्न और ZEE मीडिया कॉरपोरेशन दोनों से बाहर निकल जाएं।
इस बारे में पूछे जाने पर ZEE ने कोई जवाब नहीं दिया।
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जून तिमाही की स्थिति के अनुसार ZEE लर्न में प्रमोटरों की 21.69% और ZEE मीडिया कॉरपोरेशन में 14.72% हिस्सेदारी थी। ZEE मीडिया को पहले ZEE न्यूज के नाम से जाना जाता था। ZEE लर्न में प्रमोटरों और उनके मित्र निवेशकों की कुल हिस्सेदारी 40.68% और ZEE मीडिया कॉरपोरेशन में 43.99% है।
ZEE लर्न में नए मैनेजमेंट के लिए कदम न्यूयॉर्क स्थित हेज फंड मून कैपिटल मैनेजमेंट उठा रहा है। मून कैपिटल 2015 से 6.43% हिस्सेदारी के साथ कंपनी में सबसे बड़ी विदेशी शेयरधारक है।
मून कैपिटल मैनेजमेंट ने फरवरी 2020 में चंद्रा को बढ़ते कर्ज, कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़ी खामियों और स्पष्ट विकास रणनीति के अभाव का हवाला देते हुए ZEE लर्न छोड़ने के लिए कहा था। साथ ही इसने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टरों में से एक शायन चटर्ZEE को इंडिपेंडेट डायरेक्ट के रूप में नियुक्त करने की इच्छा जतायी।
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ZEE लर्न, माउंट लिटेरा ZEE स्कूल के तहत केZEE से बारहवीं कक्षा के स्कूलों का संचालन कर रही है। इसके 110 शहरों में 120 से अधिक स्कूल हैं। साथ ही यह एशिया की सबसे बड़ी प्री-स्कूल चेन किड्ZEE भी चलाती है। इनकी संख्या भारत और पड़ोसी देशों में 1,900 से अधिक हैं।
समूह की दूसरी कंपनी जो निवेशकों की नाराजगी का सामना कर रही है, वह है ZEE मीडिया कॉरपोरेशन। इस पर भी कॉरपोरेट गवर्नेंस में खामियों का आरोप है। साथ ही मैनेजमेंट से जुड़ी अन्य समस्याओं को उठाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़ा मुद्दा एस्सेल समूह की दोनों कंपनियों में है।
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सूत्रों के अनुसार निवेशकों का मानना है कि चंद्रा के बाहर निकलने से ZEE लर्न को एक कुशल मैनेजमेंट टीम बनाने और कंपनी में दिलचस्पी रखने वाले संभावित बिडर्स के साथ पारदर्शी तरीके से जुड़ने में मदद मिलेगी।
बता दें कि हाल ही में ZEE एंटरटेनमेंट और डिश टीवी के निवेशकों नेकॉरपोरेट गवर्नेंस की खामियों के कारण दो इंडिपेंडेट डायरेक्टरों को इस्तीफा देने के लिए कहा था। इसके बाद और पिछले सप्ताह एZEEएम से ठीक एक दिन पहले, फिर से नियुक्ति किए गये डायरेक्टरों - मनीष चोखानी और अशोक कुरियन ने इस्तीफा दे दिया।
सूत्रों ने कहा कि जाहिर है कि वही मांगें ZEE मीडिया और ZEE लर्न के मामले में की जाएगी। इसको लेकर प्रमोटर परेशान हैं।
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