बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) ने कर्ज में डूबी फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (FRL) के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) में एक याचिका दायर की है। याचिका में फ्यूचर रिटेल के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही शुरू करने की अपील की गई है।
बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) ने कर्ज में डूबी फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (FRL) के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) में एक याचिका दायर की है। याचिका में फ्यूचर रिटेल के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही शुरू करने की अपील की गई है।
फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (FRL) ने इस महीने की शुरुआत में बताया था कि वह अपने लेंडर्स को 5,322.32 करोड़ रुपये का कर्ज समय से नहीं चुका सकी। कंपनी ने बताया कि ऐसा अमेरिकी ईकॉमर्स कंपनी एमेजॉन के साथ चल रहे मुकदमों और इससे जुड़े दूसरे मुद्दों के कारण हुआ।
फ्यूचर रिटेल ने शेयर बाजारों को भेजी सूचना में बताया, "बैंक ऑफ इंडिया (BOI) ने हमें एडवांस सूचना दी है कि वह कंपनी के खिलाफ इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 की धारा 7 के तहत NCLT में एक याचिका दाखिल करने जा रही है। यह याचिका बैंक के साथ कंपनी के समझौते के तहत देय राशि का भुगतान नहीं कर पाने के चलते दाखिल किया जा रहा है।" फ्यूचर ग्रुप की इस कंपनी ने बताया कि उसे याचिका की एक कॉपी मिली है और वह इस मामले में कानूनी सलाह ले रही है।
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फ्यूचर रिटेल को बैंक ऑफ इंडिया की अगुआई वाले बैंकों के एक समूह ने कर्ज दिया है। समय से कर्ज नहीं चुका पाने के बाद बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले महीने अखबारों में विज्ञापन जारी कर फ्यूचर रिटेल की संपत्तियों पर अपना दावा किया था। साथ ही उसने किशोर बियानी की अगुवाई वाली इस कंपनी की संपत्तियों को लेकर लेनदेन करने से लोगों को आगाह किया था।
फ्यूचर रिटेल सहित फ्यूचर ग्रुप की कई कंपनियों ने 6 अगस्त 2020 को जारी RBI के एक सर्कुलर के आधार पर अपने लेंडर्स के साथ एक समझौता किया था। इसमें कोरोना महामारी से जुड़ी परेशानियों को देखते हुए एक रिजॉल्यूशन फ्रेमवर्क की घोषणा की गई थी।
बता दें कि फ्यूचर ग्रुर ने अगस्त 2020 में रिटेल, होलसेल, लॉजिस्टिक और वेयरहाउसिंग में मौजूद अपनी 19 कंपनियों को रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड को 24,713 करोड़ की एक डील में बेचने का ऐलान किया था। इसमें फ्यूचर रिटेल लिमिटेड भी शामिल है। प्रस्तावित डील के तहत ये सभी 19 कंपनियां मिलकर फ्यूचर एंटरप्राइजेज नाम से एक कंपनी बनेगी और फिर इसे रिलायंस रिटेल वेंचर्स को ट्रांसफर कर दिया जाएगा। हालांकि अमेरिकी ईकॉमर्स एमेजॉन की तरफ से चुनौती मिलने के बाद यह डील फंस गई है।
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