विवादों में घिरी कंपनी भारतपे (BhartPe) के सीईओ सुहैल समीर (Suhail Sameer) ने अपने कर्मचारियों को एक लेटर लिखा है, जिसमें उन्होंने बताया कि कंपनी के ऑपरेशन और कामकाज से जुड़े कई ''गंभीर आरोपों'' के चलते बाहरी एक्सपर्ट्स की निगरानी में ऑडिट कराना जरूरी हो गया था। इसके साथ ही उन्होंने कर्मचारियों को कंपनी के बोर्ड (BharatPe Board) पर विश्वास बनाए रखने की अपील की है। समीर सुहैल का यह लेटर ऐसे समय में सामने आया है, जब भारतपे के को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर (Ashneer Grover) की कंपनी के बोर्ड के साथ तनातनी चल रही है। अशनीर ग्रोवर ने कुछ दिनों पहले आरोप लगाया था कि बोर्ड उन्हें कंपनी से बाहर निकालना चाहता है।
समीर सुहैल ने कर्मचारियों को लिखे लेटर में उनसे कंपनी के लीडरशीप पर भरोसा बनाए रखने की अपील की है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ऑडिटरों की अंतरिम रिपोर्ट अगले एक-दो हफ्ते में आ सकती है। हालांकि उन्होंने ऑपरेशन और कामकाज से जुड़े ''गंभीर आरोपों'' आरोपों के बारे में विस्तार से कुछ नहीं कहा।
समीर ने लेटर में कहा है कि जानी-मानी और प्रतिष्ठित ऑडिट कंपनियां (SAM, PwC और अल्वारेज ऐंड मार्शल ) कंपनी के ऑपरेशंस की समीक्षा कर रही हैं। उन्होंने कहा, ''कुछ आंतरिक शिकायतों के आधार पर हमने अपने ऑपरेशन प्रॉसेस का पूरा ऑडिट करवाने का फैसला किया है। कुछ गंभीर आरोप भी हैं जिनकी अभी पुष्टि की जा रही है।''
उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है जिसे सुधारा नहीं जा सकता और इनमें से किसी का भी कारोबार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। समीर ने बताया कि ऑडिटर्स एक-दो हफ्ते में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के साथ अंतरिम रिपोर्ट शेयर करेंगे।
समीर ने लेटर में लिखा है कि भारतपे के पास बैंक में बड़ी मात्रा में, करीब 50 करोड़ डॉलर की नकदी है। इसके अलावा मौजूदा निवेशक भी कंपनी का समर्थन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि कंपनी को निकट भविष्य में पूंजी जुटाने की जरूरत नहीं है।
बता दें कि अशनीर ग्रोवर का पिछले महीने एक कथित ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह कोटक महिंद्रा बैंक के एक कर्मचारी के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा में बातचीत करते हुए सुने जा रहे थे। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद कंपनी के कामकाज को लेकर भी कई सवाल उठे, जिसके बाद अशनीर ग्रोवर कंपनी से लंबी छुट्टी पर चले गए। वहीं दूसरी तरफ बोर्ड ने कंपनी की फॉरेंसिक ऑडिट के लिए अल्वारेज एंड मार्शल और पीडब्यूसी को नियुक्ति किया, जिसे कंपनी के कामकाज और गवर्नेंस के तरीकों को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपनी हैं।