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स्टॉक एक्सचेंजों में बंद हुई HDFC के शेयरों की ट्रेडिंग, जानें कंपनी के सफर की पूरी कहानी

HDFC की शुरुआत 17 अक्टूबर, 1977 को हुई थी। दीपक पारेख के चाचा एच टी पारेख ने इसे शुरू किया था और कंपनी ने 1978 में पहला होम लोन मुंबई के डी बी रेमेडियोज को दिया था। इस कंपनी के फाउंडर्स का काम आसान नहीं था। उस वक्त होम लोन पॉपुलर प्रॉडक्ट नहीं थे और HDFC ब्रांड को कोई नहीं जानता था

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 12, 2023 पर 9:19 PM
स्टॉक एक्सचेंजों में बंद हुई HDFC के शेयरों की ट्रेडिंग, जानें कंपनी के सफर की पूरी कहानी
HDFC बैंक के साथ मर्जर होने के बाद HDFC का स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो गया।

हाउसिंग डिवेलपमेंट एंड फाइनेंस कॉरपोरेशन (HDFC) के शेयरों की ट्रेडिंग 12 जुलाई को बंद हो गई। इस तरह, देश की सबसे पुरानी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी की 4 दशकों की यात्रा खत्म हो गई। HDFC बैंक के साथ मर्जर होने के बाद HDFC का स्वतंत्र अस्तित्व भी समाप्त हो गया।

HDFC की शुरुआत 17 अक्टूबर, 1977 को हुई थी। दीपक पारेख के चाचा एच टी पारेख ने इसे शुरू किया था और कंपनी ने 1978 में पहला होम लोन मुंबई के डी बी रेमेडियोज को दिया था। इस कंपनी के फाउंडर्स का काम आसान नहीं था। उस वक्त होम लोन पॉपुलर प्रॉडक्ट नहीं थे और HDFC ब्रांड को कोई नहीं जानता था।

हालांकि, टीम ने कड़ी मेहनत की और पारंपरिक बैंकों से प्रतिस्पर्धा करते हुए अपने बिजनेस का विस्तार किया। साल 1984 तक HDFC का सालाना लोन भुगतान का आंकड़ा 100 करोड़ रुपये को पार कर गया। यह एक कंपनी के लिए बड़ी उपलब्धि थी। यह कंपनी 1978 में लिस्ट हुई थी। हालांकि, उस वक्त इसे अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला था। इसे पर्याप्त सब्क्रिप्शन भी नहीं मिला था, लेकिन यह एक बड़ी फाइनेंशियल कंपनी के सफर की शुरुआत थी। 12 जुलाई, 2023 को जब एक्सचेंजों में HDFC के शेयरों की ट्रेडिंग बंद हुई, तो इस कंपनी का मार्केट कैपिटल 5 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा था।

इस कंपनी को खड़ा करने में दीपक पारेख ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने हाल ही में कंपनी के चेयरमैन समेत बाकी सभी पदों से इस्तीफा दिया है। HDFC के साथ चार दशक बिताने के बाद उन्होंने कंपनी को अलविदा कहा। इसके साथ ही, कंपनी में एक युग का अंत हो गया।

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