आइडिया और वोडाफोन के मर्जर के बाद कंपनी का 15 से 20 फीसदी हिस्सा बेच सकती है। इसके लिए कंपनी प्राइविटी इक्विटी फंड से बोली बुला सकती हैं। हिस्सादारी बेचकर मिले पैसे से कंपनी 1 लाख करोड़ रुपये का कर्ज चुकाएगी साथ ऑपरेशन को मजबूत बनाने के लिए निवेश करेगी। आइडिया और वोडाफोन की विलय के बाद बनने वाली कंपनी में कम से कम 51 फीसदी हिस्सेदारी रहेगी।
