Pawan Hans के लिए बोली लगाने से JSW स्टील का इनकार, कहा- 'इसकी संपत्तियों में दिलचस्पी नहीं'

मीडिया रिपोर्ट्स में यह कहा गया था कि सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी पवन हंस लिमिटेड को खरीदने के लिए JSW स्टील और जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड सहित कई कंपनियों ने बोली लगाई है

अपडेटेड Apr 25, 2022 पर 4:41 PM
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वित्तीय संकटों का सामना कर रही पवन हंस में सरकार अपनी 51% की पूरी हिस्सेदारी बेच रही है

जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड (JSW Steel Ltd) ने सोमवार को उन खबरों का खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि उसने हेलीकॉप्टर सेवा मुहैया कराने वाली सरकारी कंपनी पवन हंस (Pawan Hans) के लिए बोली लगाई है। JSW स्टील ने कहा कि उसकी पवन हंस की संपत्तियों को खरीदने में कोई दिलचस्पी नहीं है।

जेएसडब्ल्यू स्टील ने एक बयान में कहा, "हाल में अज्ञात सूत्रों के हवाले से मीडिया में ऐसी खबरें चलाई गई थीं कि JSW स्टील लिमिटेड ने पवन हंस को खरीदने के लिए बोली लगाई है। हम इन खबरों को पूरी तरह खारिज करते हैं और कंपनी की पवन हंस की सपंत्तियों में कोई दिलचस्पी नहीं है। इससे जुड़ी मीडिया खबरें निराधार हैं और इनमें कोई दम नहीं हैं।"

बता दें कि इससे पहले न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग ने एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया था सरकार बीते शनिवार को पवन हंस लिमिटेड की बिक्री प्रक्रिया को अंतिम रूप दे सकती है और इसके लिए JSW स्टील और जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड सहित कई कंपनियों ने बोली लगाई है। इस बीच JSW स्टील के शेयर सोमवार को एनएसई पर 0.89 फीसदी गिरकर 716.95 रुपये पर बंद हुए।


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सरकार बेचेगी पूरी 51 फीसदी हिस्सेदारी

वित्तीय संकटों का सामना कर रही पवन हंस में सरकार अपनी 51 फीसदी की पूरी हिस्सेदारी बेच रही है। बाकी 49 फीसदी हिस्सेदारी पब्लिक सेक्टर की कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के पास है और वह भी अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचना चाहती है। ONGC ने भी अपनी पूरी हिस्सेदारी उसी कीमत और शर्तों पर बेचने का फैसला किया है, जिस पर सरकार ने सहमति जताई है।

1985 में हुई थी स्थापना

पवन हंस की स्थापना 1985 में की गई थी और इसके पास 40 से अधिक हेलीकॉप्टर का बेड़ा है। यह कंपनी ओएनजीसी को तेल और गैस के खोज से जुड़ी गतिविधियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं देती है। साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों में सरकार के विभिन्न कार्यों के लिए भी हेलीकॉप्टर सेवाएं मुहैया कराती है। इसके अलावा यह दमन-दीव, बद्रीनाथ-केदारनाथ और कुछ उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ पहाड़ी इलाकों को जोड़ने के लिए भी हेलीकॉप्ट सेवा चलाती है।

साल 2018 से बेचने की हो रही है कोशिश

कंपनी को वित्त वर्ष 2019-20 में कुल 28 करोड़ रूपये का घाटा हुआ था और उसके एक साल पहले यह आंकड़ा 69 करोड़ रुपये था। सरकार ने पवन हंस में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए 2018 में बोलियां मंगाई थीं। हालांकि जब ONGC ने अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया तो सरकार ने अपने कदम वापस खींच लिए। 2019 में कंपनी को बेचने का एक और प्रयास हुआ था लेकिन तब निवेशकों ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई।

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