25 अप्रैल को भारतीय बाजारों में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिल रही है। आज के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1 फीसदी टूटे हैं। आईटी और एफएमसीजी कंपनियों ने आज बाजार में सबसे ज्यादा दबाव बनाया है। निफ्टी आईटी और एफएमसीजी इंडेक्स में आज 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है।
IFR Global ने अपने एक नोट में कहा है कि यूएस फेड की आक्रामक मौद्रिक नीति चीन में कोविड के चलते लागू लॉकडाउन, रूस और यूक्रेन में चल रहे युद्ध इस समय ग्लोबल मार्केट को सबसे ज्यादा चोट पहुंचा रहे हैं।
फिलहाल 1.40 बजे के आसपास निफ्टी 197.20 अंक यानी 1.15 फीसदी की गिरावट के साथ 16,974.75 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं सेंसेक्स 589.63 अंक यानी 1.03 फीसदी टूटकर 56,607.52 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
आइए डालते हैं बाजार की कमजोरी के कारणों पर एक नजर
22 अप्रैल को अमेरिकी बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। डाओ जोन में 2020 के बाद की सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट सामने आई। चाइना के हॉगकॉग के साथ ही दूसरे एशियाई बाजारों में भी आज शुरुआती कारोबार में कमजोरी देखने को मिली।
2. चाइना में कोविड -19 का कहर
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी और सबसे बड़ी ग्रोथ ड्राइवर चाइनीज इकोनॉमी पर कोरोना के नए आक्रमण का असर देखने को मिल रहा है। चीन की जीरो कोविड-19 पॉलिसी की वजह से उसके कई बड़े शहरों में कठोर लॉकडाउन लागू कर दिया गया है जिससे उत्पादन और खपत दोनों पर निगेटिव असर देखने को मिला है। चीन की इकोनॉमी में मंदी आने की चिंता से ग्लोबल ग्रोथ और एक्सपोर्ट पर निगेटिव असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
इंडोनेशिया की तरफ से पाम ऑयल एक्सपोर्ट पर बैन लगाए जाने के बाद एक बार फिर बाजार का फोकस महंगाई पर बन गया है। बता दें कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाले तमाम प्रोडक्ट में पाम ऑयल का उपयोग होता है। इन प्रोडक्ट में शैंपू से लेकर स्प्रेड तक तमाम चीजें शामिल हैं। पाम ऑयल पर प्रतिबंध से बाजार में और महंगाई बढ़ने की आशंका है। बता दें कि बाजार में खुदरा महंगाई पहले से ही 7 फीसदी के आसपास घूम रही है और मांग में भी कमजोरी नजर आ रही है। इंडोनेशिया द्वारा पाम ऑयल एक्सपोर्ट पर बैन लगाने से स्थितियां और खराब हो सकती हैं। बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।
4. अमेरिका में ब्याज दरों में जल्द ही हो सकता है बढ़ोतरी का ऐलान
यूएस फेड के मुखिया Jerome Powell ने हाल ही में कहा है कि मई में होने वाली फेड की मीटिंग ब्याज दरों में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हो सकती है। उसके बाद जून में भी ब्याज दरों में इतनी ही बढ़ोतरी हो सकती है। इस खबर के चलते निवेशकों का सेटिमेंट खराब हुआ।
रूस-यूक्रेन की लड़ाई अपने दूसरे महीने में है। लंबी खिंचती यह लड़ाई इक्विटी मार्केट का मूड खराब कर रही है। इस लड़ाई के कारण सप्लाई चेन में बाधा आ रही है और महंगाई आसमान छू रही है। रूस पर और प्रतिबंधों का डर क्रूड ऑयल की कीमतों को 100 डॉलर के ऊपर बनाए रखेगी। यह भारत जैसे इकोनॉमी के लिए बहुत बढ़ा निगेटिव फैक्टर है
FPI की तरफ से भारतीय बाजार में लगातार हो रही बिकवाली बाजार में कमजोरी का एक बड़ा कारण है। FPI भारतीय बाजार में लगातार 7वें महीने नेट सेलर रहने के राह पर हैं। अक्टूबर से अब तक FPI भारतीय बाजार से 2 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। इसकी वजह यूएस फेड की तरफ से ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाएं और ग्लोबल फाइनेंशियल स्थिति में आ रही मुश्किलें हैं।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।