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LIC और ACESO एक बार फिर आमने-सामने, बीमा कंपनी ने विज्ञापन देकर पॉलिसीहोल्डर्स को किया सावधान

देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) कुछ समय के ठहराव के बाद एक बार फिर से ACESO के खिलाफ कानूनी लड़ाई को लेकर सक्रिय हो गई है। ACESO एक ऐसी फर्म है, जिसकी स्थापना का घोषित मकसद LIC के पॉलिसीहोल्डर्स को 'मॉनेटाइज' करना है। LIC ने 13 अगस्त को अखबारों में विज्ञापन देकर तीसरे पक्षों (मसलन ACESO) को पॉलिसी देने के बारे में पॉलिसीहोल्डर्स को सावधान किया था

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 15, 2024 पर 8:11 PM
LIC और ACESO एक बार फिर आमने-सामने, बीमा कंपनी ने विज्ञापन देकर पॉलिसीहोल्डर्स को किया सावधान
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) वित्त वर्ष 2025 में शेयर बाजार में करीब 1.30 लाख करोड़ रुपये निवेश करेगी।

क्यों शुरू हुई कानूनी लड़ाई

इस 'विवाद' की जड़ में पॉलिसी असाइनमेंट का कॉन्सेप्ट है, जिसके तहत पॉलिसीहोल्डर्स को इस बात की अनुमति दी गई है कि वे अपने अधिकार और बेनिफिट्स 'असाइनी' को ट्रांसफर करें। इस मामले में 'असाइनी' ACESO द्वारा स्थापित किया गया ट्रस्ट है। फर्म की वेबसाइट के मुताबिक, ACESO के ऑफर के तहत पॉलिसीहोल्डर्स अपनी पॉलिसी सरेंडर वैल्यू (जो उन्हें LIC से मिलती) के बराबर भुगतान के आधार पर ट्रस्ट को असाइन कर सकते हैं।

बहरहाल, LIC का कहना है कि यह गतिविधि 'पॉलिसी की ट्रेडिंग' के दायरे में आती है, जिसे कानूनी तौर पर मंजूरी नहीं है। तीसरे पक्षों को पॉलिसी असाइनमेंट के बारे में पूछे जाने पर LIC के चेयरमैन सिद्धार्थ मोहंती का कहना था, ' यह कुछ और नहीं बल्कि पॉलिसी की ट्रेडिंग है। विज्ञापनों (ACESO) में जो भी कहा गया है, लेकिन यह पॉलिसीहोल्डर्स के हितों के खिलाफ है। हम सैद्धांतिक तौर पर इसका विरोध करते हैं। हम इसके खिलाफ सभी विकल्प खंगालेंगे।'

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