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मुश्किलें बड़ी थीं, हौसला उससे भी बड़ा! पैरों से लिखकर रच रही इतिहास 13 साल की बच्ची

एक दिव्यांग बच्ची की कहानी उसके हौसले और आगे बढ़ने की कोशिश की कहानी है। 13 साल की एक बच्ची पैरों से लिखकर अपनी पढ़ाई जारी रख रही हैं और अपने जज्बे से लोगों को इंस्पायर कर रही हैं। उनकी मेहनत बताती है कि जिंदगी में मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, हिम्मत और लगन के साथ आगे बढ़ने का रास्ता हमेशा निकाला जा सकता है।

Roopali Sharmaअपडेटेड Aug 13, 2026 पर 5:07 PM
मुश्किलें बड़ी थीं, हौसला उससे भी बड़ा! पैरों से लिखकर रच रही इतिहास 13 साल की बच्ची

13 साल की लक्ष्मी अपनी हिम्मत और मेहनत से लोगों को इंस्पायर कर रही हैं। शरीर से विकलांग होने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को रुकने नहीं दिया और अपने स्कूल का काम पूरा करने का रास्ता खुद खोज लिया। वह पैरों से लिखकर अपनी पढ़ाई जारी रख रही हैं और हर दिन यह साबित कर रही हैं कि मुश्किल हालात भी किसी के हौसले को रोक नहीं सकते।

सरकारी स्कूल की चौथी कक्षा में पढ़ने वाली स्टूडेंट का जज्बा उन बच्चों के लिए भी इंस्पिरेशन है, जो किसी न किसी चुनौती का सामना कर रहे हैं। उनके लिए पढ़ाई सिर्फ स्कूल का काम नहीं, बल्कि अपने सपनों की ओर बढ़ने का एक जरिया है। उनकी मेहनत और आत्मविश्वास हमें सिखाता है कि हालात चाहे जैसे हों, कोशिश जारी रखी जाए तो रास्ता जरूर निकाला जा सकता है।

 

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