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महंगी दवाओं का ट्रेड मार्जिन 100% से भी ज्यादा, NPPA की एनालिसिस से सामने आई हकीकत

मैन्युफैक्चर्स जिस कीमत पर दवा बेचता है और ग्राहक जिस कीमत (MRP) दवा खरीदता है, उसके बीच के अंतर को ट्रेड मार्जिन (Trade Margin) कहा जाता है। किसी टैबलेट की कीमत जैसे-जैसे बढ़ती है, उसका ट्रेड मार्जिन वैसे-वैसे बढ़ता जाता है

MoneyControl Newsअपडेटेड May 21, 2022 पर 12:30 PM
महंगी दवाओं का ट्रेड मार्जिन 100% से भी ज्यादा, NPPA की एनालिसिस से सामने आई हकीकत
50-100 रुपये कीमत की रेंज में आने वाले 2.97 फीसदी टैबलेट का ट्रेड मार्जिन 50-100 फीसदी के बीच है।

महंगी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन ज्यादा है। खासकर उन दवाओं के मामले में ऐसा है, जिनकी कीमत प्रति टैबलेट 100 रुपये से ज्यादा है। नेशनल फार्मास्युटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के एनालिसिस से यह जानकारी मिली है। न्यूज वेबसाइट न्यूज18 डॉटकॉम ने यह खबर दी है। एनपीपीए का काम दवाओं की कीमतों को कंट्रोल में रखना है। यह दवा कंपनियों का रेगुलेटर है।

एनपीपीए ने शुक्रवार को दवा बनाने वाली बड़ी कंपनियों के प्रतनिधियों से मुलाकात की। इसमें नॉन-शिडयूल्ड मेडिसिंस पर ट्रेडर्स के मार्जिन को तर्कसंगत बनाने पर चर्चा हुई। ट्रेड मार्जिन रेशनलाइजेशन (TMR) दवाओं की कीमतों को तर्कसंगत बनाने का एक तरीका है। इसमें सप्लाई चेन में ट्रेड मार्जिन की सीमा तय कर दी जाती है।

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मैन्युफैक्चर्स जिस कीमत पर दवा बेचता है और ग्राहक जिस कीमत (MRP) दवा खरीदता है, उसके बीच के अंतर को ट्रेड मार्जिन (Trade Margin) कहा जाता है। किसी टैबलेट की कीमत जैसे-जैसे बढ़ती है, उसका ट्रेड मार्जिन वैसे-वैसे बढ़ता जाता है।

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