घुमक्कड़ी का शौक है तो आपने Thomas Cook का नाम जरूर सुना होगा? दुनिया की सबसे पुरानी ट्रैवल कंपनी सोमवार को धराशायी हो गई। ब्रिटेन की इस ट्रैवल कंपनी की चर्चा हर जुबान पर है क्योंकि कभी यह घुमने वालों का सपना हुआ करती थी।
टूर एंड ट्रैवल की इस कंपनी की शुरुआत 1841 में हुई थी। दो वर्ल्ड वॉर देखने के बावजूद बचने वाली यह कंपनी कमजोर डिमांड की मार नहीं सह पाई। दुनिया भर के 16 देशों में 1.90 करोड़ लोगों के लिए कंपनी होटल, रिजॉर्ट्स और एयरलाइन मुहैया कराती है। फिलहाल दुनिया भर में 6 लाख सैलानी हैं जो सरकार और इंश्योरेंस कंपनियों को कॉर्डिनेट करके कंपनी को बचाने का दबाव डाल रहे हैं।
कंपनी के डूबने से दुनिया भर में अफरातफरी का माहौल है। गोवा, गाम्बिया और ग्रीस जैसी जगहों पर ऐसे कई होटल हैं जहां कंपनी ने होटलों को पेमेंट नहीं किया है। लॉन्ग टर्म में देखें तो इसकी चोट टूरिज्म इंडस्ट्री पर पड़ेगी। Thomas Cook के ट्रैवल एजेंट्स के पास पैसा नहीं होने की वजह से स्पेन और तुर्की जैसे डेस्टिनेशन पर फ्यूल सप्लायर्स का नतीजा भी ठनठन गोपाल है।
कर्ज का भारी बोझ
कंपनी पर 1.7 अरब पौंड का कर्ज है। ऑनलाइन कॉम्पिटिशन बढ़ने, ट्रैवल मार्केट बदलने और जियोपॉलिटकल इवेंट की वजह से कंपनी को नुकसान हुआ है। पिछले साल यूरोप में गर्मी बहुत ज्यादा रहने और लू की वजह से बुकिंग आखिरी पलों में कैंसल हुई थी।
कंपनी के चीफ एग्जिक्यूटिव पीटर फैंकह्यूजर ने कहा कि यह बहुत दुख की बात है कि कंपनी का कारोबार बंद हो गया है। पिछले कई हफ्तों से बातचीत के बावजूद कंपनी को कोई राहत पैकेज नहीं मिल पाया।
क्या करेंगे यात्री?
यूके की सिविल एविएशन अथॉरिटी ने कहा कि Thomas Cook की ट्रेडिंग बंद कर दी गई है। रेगुलेटर और सरकार मिलकर फ्लीट रेडी कर रहे हैं ताकि अगले दो हफ्तों में 1.5 लाख से ज्यादा ब्रिटिश कस्टमर्स को विदेश से वापस लाया जा सके।
Thomas Cook के जरिए टिकट बुक कराने वाले कस्टमर्स तब तक एयरपोर्ट नहीं जाएंगे, जब तक एक स्पेशल वेबसाइट thomascook.caa.co.uk के जरिए उन्हें यह नहीं बताया जाता कि उनके लिए सरकार ने रिटर्न की फ्लाइट कब अरेंज की है।
ब्रिटिश रेगुलेटर Thomas Cook से जुड़े सभी होटलों से संपर्क कर रही है और संदेश दे रही है कि इंश्योरेंस स्कीम के जरिए उनका भुगतान अब सरकार करेगी। इससे पहले खबर आई थी कि ट्यूनिशिया के होटल में कंपनी ने यात्रियों को बंधक बना लिया और उनसे पेमेंट की मांग करने लगे। इसके बाद सरकार को दखल देना पड़ा।
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