ऑनलाइन रिटेल कंपनियों में नौकरियों का गुब्बारा अब फूटने लगा है। स्नैपडील के बाद अब yepme.com भी 80 फीसदी स्टाफ की छंटनी करने जा रही है। कंपनी फंड की कमी से जूझ रही है और फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के दबाव में कर्मचारियों ने चुप्पी साध रखी है।
ऑनलाइन रिटेल कंपनियों में नौकरियों का गुब्बारा अब फूटने लगा है। स्नैपडील के बाद अब yepme.com भी 80 फीसदी स्टाफ की छंटनी करने जा रही है। कंपनी फंड की कमी से जूझ रही है और फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के दबाव में कर्मचारियों ने चुप्पी साध रखी है।
फैशन ई-कॉमर्श कंपनी yepme.com ने अपने करीब 80 परसेंट कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने को कहा है लेकिन आधिकारिक तौर पर नहीं बल्कि मौखिक तौर पर। कंपनी के एक विश्वसनीय सूत्र से मिली जानकारी के मुताबिक कंपनी पैसों की कमी से जूझ रही है और इस वजह से अपने कर्मचारियों को सैलरी तक नहीं दे पा रही है। हाल ये है कि बड़े पैमाने पर yepme.com के कर्मचारियों को पिछले साल अक्टूबर से अब तक सैलरी भी नहीं मिली है।
येपमी के कर्मचारियों को बकाया सैलरी मिलेगी या नहीं इस बारे में कोई आश्वासन भी उन्हें नहीं मिल रहा है। इससे कंपनी के सभी कर्मचारियों में घबराहट है। दबी जुबान में सभी मान रहे हैं कि उनकी नौकरी खतरे में है हालांकि कई कोशिशों के बावजूद कोई भी कर्मचारी कैमरे के सामने आने को तैयार नहीं हुआ।
सीएनबीसी-आवाज़ ने इस मसले पर yepme.com के मैनेजमेंट से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। हां एक अधिकारी ने नाम का खुलासा ना करने की शर्त पर ये जरूर बताया कि 13 मार्च तक उन सभी कर्मचारियों को कंपनी के दफ्तरों में नहीं आने दिया जाएगा जिन्हें इस्तीफा देने को कहा गया है।
बता दें कि वित्त वर्ष 2015 में कंपनी को 106.3 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था जो 2016 में बढ़कर 184 करोड़ रुपए हो गया था। yepme.com ऑफलाइन औऱ ऑनलाइन दोनों कारोबार में है। जानकारी मिली है कि कंपनी अब अपने ऑफलाइऩ फ्रेंचाइज़ी बिनजेनस पर ज्यादा ध्यान देने का मन बना रही है।
वहीं ई-कॉमर्स में हो रही छंटनी को वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारामन खास चिंता की बात नहीं मानतीं।
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