Yes Bank को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 30 नवंबर को यूपी पुलिस के उस फैसले पर स्टे लगा दिया जिसमें डिश टीवी के एनुअल जनरल मीटिंग में Yes Bank के वोटिंग राइट्स को फ्रीज कर दिया था। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में एक बेंच ने कहा कि कॉरपोरेट मामले में पुलिस की कार्रवाई अपवाद है और अगले आदेश तक इस पर स्टे लगा दिया गया है। बेंच ने कहा, "हम गौतम बुद्ध नगर में बैठे पुलिस अधिकारी को शेयरहोल्डर्स के वोटिंग राइट्स रोकने की अनुमति नहीं दे सकते हैं।" कोर्ट ने कहा, "पुलिस ने यहां वो काम किया है जो नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल ने नहीं किया है।"
Yes Bank की पैरवी कर रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने इस महीने की शुरुआत में ही यह सवाल उठाया था कि क्या यूपी पुलिस के पास यह अधिकार है कि वह Yes Bank को वोटिंग करने से रोक सके। यूपी पुलिस ने जब Yes Bank के वोटिंग राइट्स पर रोक लगाने का नोटिस भेजा तो सिंघवी ने आरोप लगाया कि इस नोटिस का मकसद डिश टीवी के सबसे बड़े निवेशक Yes Bank को वोटिंग करने से रोकना है।
अगर डिश टीवी के जनरल आम बैठक (AGM) के दौरान Yes Bank वोटिंग करता है तो वह डायरेक्टर्स के रीअप्वाइनमेंट के खिलाफ वोट करेगा। बैंक को ऐसा करने से रोकने के लिए AGM से पहले यूपी पुलिस ने Yes Bank के वोटिंग राइट्स रोकने का नोटिस भेजा।
Essel Group ने Yes Bank के खिलाफ जो केस किया था वह इस साल की शुरुआत में ही उसने वापस ले लिया। हालांकि इस मामले में दायर FIR अगस्त 2020 से ही चल रहा है और पुलिस ने इस मामले में एक साल बाद कार्रवाई की।
इस पर कोर्ट ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से न्यायिक प्रक्रिया को छोटा नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, "क्रिमिनल केस के जरिए सिविल प्रोसिडिंग के नतीजे हासिल करने के खतरनाक परिणाम हो सकते हैं।"
Yes Bank ने 2016-2018 के बीच Essel Group को 5270 करोड़ रुपए का लोन दिया था। लेकिन Yes Bank का घोटाला सामने आने और बैंक का नया बोर्ड बनने के बाद बैंक ने Dish Tv को दिए लोन रिकवरी का काम शुरू किया। कंपनी के प्रमोटर कर्ज चुकाने में नाकाम रहे जिसकी वजह से Yes Bank ने Essel Group में 25% हिस्सेदारी ले ली। Yes Bank ने 2020 की शुरुआत में गिरवी रखे शेयरों को अपने कब्जे में ले लिया।