UPSC (यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन) यकीनन भारत में सबसे कठिन परीक्षा आयोजित करता है, जहां लोगों को कई प्रयासों के बाद भी परीक्षा को पास करना मुश्किल होता है। वहीं, मध्य प्रदेश की रहने वाली जन्म से ही दिव्यांग श्रेया राय ने दो बार इस परीक्षा को पास करने में सफलता हासिल की है। पहले प्रयास में अपनी रैंक से नाखुश, श्रेया ने महज 25 साल की उम्र में न केवल UPSC की प्रतिष्ठा पूर्ण IES (इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेस) परीक्षा में न केवल 60वीं रैंक हासिल की, बल्कि अखिल भारतीय स्तर पर श्रेया को हियरिंग कटेगरी में इंडिया टॉप करने का श्रेय भी मिला है।
हालांकि श्रेया का यह पहला कारनामा नहीं है। वह पहले ही कोल इंडिया, न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन और पावर ग्रिड ऑफ इंडिया के लिए भर्ती परीक्षा पास कर चुकी हैं। कई प्रतिष्ठित सरकारी क्षेत्र की नौकरियों को पास करने के बावजूद, श्रेया यूपीएससी परीक्षा पास करना चाहती थी, क्योंकि वह कलेक्टर बनना चाहती थी।
मगर, माता-पिता की खुशी के लिए श्रेया ने ब्यूरोके्रट की जगह टेक्नोक्रेट बनने में ही अपनी खुशी समझी। उनका कहना है कि अब यही उनकी मंजिल है। नेचर और क्लासिकल डांसिंग के विविध विषयों पर चित्रकारी श्रेया का खास शौक है। सुनने और बोलने में अक्षम होने के बावजूद, श्रेया एक समर्पित शिक्षार्थी रही हैं।
श्रेया उन लोगों में से एक है जो न तो ठीक से सुन सकती और न ही बोल सकती। फिर भी उसने इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेस (IES) में हियरिंग कटेगरी में ऑल इंडिया रैंकिंग में नंबर वन आकर सबको एक हौसला देने का काम किया है। उसके माता-पिता को उसकी शारीरिक बाधाओं का एहसास तब हुआ जब वह केवल 1.5 वर्ष की थी।
श्रेया जब डेढ़ साल की थी तब उसके मम्मी-पापा को पता चला कि वह सुन-बोल नहीं सकती। उस दौरान वह थोड़ा नर्वस हुए, लेकिन उन्होंने ठान लिया कि बेटी को ऐसी परवरिश देनी है कि वह बेचारेपन की शिकार नहीं, बल्कि सम्मान की हकदार बने। आज उनकी मेहनत रंग लाई और बेटी ने देशभर में नाम रौशन कर दिया है।
श्रेया मध्य प्रदेश के सतना जिले की मूल निवासी हैं और वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। श्रेया की मां अंशु राय एक निजी स्कूल में वाइस प्रिंसिपल हैं, जबकि उनके पिता संजय शेयर बाजार में काम करते हैं। श्रेया का एक छोटा भाई शिवांश है जो 8वीं कक्षा में पढ़ता है और वैज्ञानिक बनना चाहता है।
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