15वें फाइनेंस कमीशन ने वर्ष 2021 से 2026 तक सेना के आधुनिकीरण के लिए 2.38 लाख करोड़ रुपये के नॉन-लैप्सेबल डिफेंस फंड (Non-Lapsable Defence Fund) की सिफारिश की थी, जिस पर केंद्र सरकार ने सहमति दे दी है। बजट 2021 (Budget 2021) पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मोटे तौर पर डिफेंस और इंटरनल सिक्योरिटी के लिए 15वें फाइनेंस कमीशन के नॉन-लैप्सेबल फंड की सिफारिशों पर हमारी सहमति है। उन्होंने कहा कि अब इसके तौर-तरीकों और स्ट्रक्चर पर काम किया जाएगा।

15वें फाइनेंस कमीशन की सिफारिश के मुताबिक, केंद्र सरकार द्वारा राज्यों के साथ साझा किए जानेवाले टैक्स रेवेन्यू को 42% से घटाकर 41% करने का सुझाव दिया गया है और इस 1% रेवेन्यू को इस फंड में देने की सिफारिश की गई है। इसका मतलब यह होगा कि राज्यों को इस फंड के खर्च का वहन करना होगा, जबकि डिफेंस और नेशनल सिक्योरिटी संविधान की 7वें शेड्यूल के मुताबिक केंद्र सरकार का दायित्व है। इस फंड की सिफारिश के पीछे मकसद बताया गया है कि इससे डिफेंस और इंटरनल सिक्यॉरिटी के लिए जरूरी बजट और अलॉट किए बजट के बीच का गैप पूरा होगा।

हर साल 51,000 करोड़ रुपये आबंटित करने का सिफारिश

आपको बता दें कि रक्षा मंत्रालय की तरफ से काफी लंबे समय से नॉन-लेप्सेबल फंड की मांग होती रही है, ताकि मिलिट्री मॉर्डनाइजेशन के लिए बजट की कमी नहीं हो। नॉन लेप्सेबल फंड का मतलब होता है वह फंड जिसमें आबंटित किया गया पैसा साल गुजर जाने के बाद भी लेप्स नहीं होता है, बल्कि उसे आगे इस्तेमाल किया जा सकता है। वित्त आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 से 2026 के लिए 2.38 लाख करोड़ रुपये के नॉन-लैप्सेबल फंड की सिफारिश की गई है, जिसमें कहा गया है कि हर साल इस फंड में मैक्सिमम 51,000 करोड़ रुपये आबंटित किए जाएं। सिफारिश के मुताबिक, इस फंड पर रक्षा मंत्रालय का अधिकार होगा और गृह मंत्रालय फंड के उसी हिस्से को इस्तेमाल कर सकेगा जो उसके लिए अलॉट किया जाएगा।

यहां होगा फंड का इस्तेमाल

संसद में पेश वित्त आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, नॉन-लैप्सेबल फंड का इस्तेमाल तीन चीजों के लिए किया जाएगा। पहला डिफेंस सर्विसेज के मॉर्डनाइजेशन के लिए खरीद में इस फंड का इस्तेमाल होगा। साथ ही सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) के लिए खरीद में और स्टेट पुलिस फोर्स के मॉर्डनाइजेशन के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके अलावा फंड का एक हिस्सा सेना और पैरा मिलिट्री के जवानों के वेलफेयर में खर्च किया जाएगा। वित्त आयोग की सिफारिश में साफ कहा गया है कि यह फंड डिफेंस बजट के अतिरिक्त होगा।

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