Twitter पर चुनाव के दौरान चलाए जाने वाले Hastag को माना जाए राजनीतिक विज्ञापन, समिति ने EC को सौंपी रिपोर्ट

समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) कार्यालय में एक अलग सोशल मीडिया मॉनीटरिंग सेल बनाने की भी सिफारिश की है
अपडेटेड Mar 02, 2021 पर 12:26  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पिछले साल चुनाव आयोग (EC) की तरफ से गठित एक विशेषज्ञ समिति ने सिफारिश की है कि ट्विटर (Twitter) पर हैशटैग (Hashtag) ट्रेंड को चुनाव के दौरान राजनीतिक विज्ञापनों के रूप में माना जा सकता है, यानी समिति का कहना है कि चुनाव के समय राजनीतिक पार्टियों की तरफ से चलाए जाने वाले ट्विटर हैशटैग को विज्ञापन का रूप माना जा सकता है।


टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, समिति ने जनवरी में पोल ​​पैनल को सौंपी अपनी अंतरिम रिपोर्ट में जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) कार्यालय में एक अलग सोशल मीडिया मॉनीटरिंग सेल बनाने की भी सिफारिश की है, ताकि चुनाव के दौरान सोशल मीडिया (Social Media) पर राजनीतिक विज्ञापनों पर नजर रखी जा सके।


बता दें कि फरवरी में भारत ने कुछ कंटेंट को हटाने के अपने आदेशों का पालन नहीं करने के लिए ट्विटर को फटकार लगाई थी और सोशल मीडिया दिग्गज को चेतावनी दी थी कि उसे स्थानीय कानूनों का पालन करने की आवश्यकता है।


केंद्र ने यह भी चेतावनी दी थी कि वह भारत में ट्विटर के शीर्ष अधिकारियों को यह कहने पर गिरफ्तार किया जा सकता है कि "भड़काऊ सामग्री" पर रोक लगाने के लिए मांगी गई अकाउंट की लिस्ट नहीं दी जा सकती है। सरकार ने कहा कि आईटी अधिनियम की धारा 69A के तहत दिए गए पहले के नोटिस का पालन करने के लिए कंपनी के इनकार करने पर उसका "धैर्य खत्म हो रहा है।"


रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट, जिसने सरकार के आदेश के मुताबिक, बताए गए आधे अकाउंट को बंद कर दिया है और कंपनी अब अदालतों का दरवाजा खटखटा सकती है, क्योंकि ये "हम जिन लोगों की सेवा करते हैं, उनकी ओर से स्वतंत्र अभिव्यक्ति का अधिकार"।


दरअसल भारत ने ट्विटर पर 1100 से ज्यादा अकाउंट और पोस्ट्स को हटाने का आदेश दिया है और आरोप लगाया है कि नए कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ भारतीय किसानों के व्यापक विरोध प्रदर्शन (Farmers Protest) के बारे में गलत जानकारियां फैलाई जा रही हैं।


सरकार ने यह भी कहा, “ट्विटर अपने नियम और दिशानिर्देश बनाने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन भारत के संसद द्वारा अधिनियमित भारतीय कानूनों को ट्विटर के अपने नियमों और दिशानिर्देशों के बावजूद पालन किया जाना चाहिए।"


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