Moneycontrol » समाचार » फाइनेंशियल प्लानिंग

मदर्स डेः विमेन फाइनेंस लीडर्स और उनकी मांओं ने एक दूसरे से सीखे बचत और निवेश के तरीके

जीवन के पहले वित्तीय सबक अधिकतर लोग घर पर मां से सीखते हैं। इससे उन्हें बाद में वित्तीय योजना बनाने और अपने लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलती है
अपडेटेड May 10, 2021 पर 08:01  |  स्रोत : Moneycontrol.com

आजादी के बाद शुरुआती दशकों में अधिकतर महिलाएं गृहणियां थी लेकिन उन्हें पैसे के महत्व की समझ थी। वे भले ही निवेश, म्यूचुअल फंड या इंश्योरेंस के बारे में नहीं जानती थी लेकिन उनकी घर का बजट बनाने, बचत करने और महंगाई को मात देने पर अच्छी पकड़ थी।


हमारे में से बहुत से लोग अब वित्तीय तौर पर स्वतंत्र हो सकते हैं लेकिन अधिकतर लोगों को उनके पहले वित्तीय सबक उनकी मां से ही मिले हैं। हम 9 मई को मदर्स डे (Mother’s Day) मना रहे हैं और इस अवसर पर मनीकंट्रोल ने कॉरपोरेट जगत में फाइनेंस की टॉप पोजिशंस पर मौजूद महिलाओं से एक महत्वपूर्ण वित्तीय सबक के बारे में पूछा जो उन्होंने अपनी मां से सीखा था। इसके साथ ही हमने उनसे ऐसे वित्तीय उपहार की जानकारी ली जो बच्चों को इस दिन अपनी मां को देना चाहिए।


सबक 1: एक इमरजेंसी फंड बनाएं


HDFC की मैनेजिंग डायरेक्टर रेणु सूद कर्नाड ने बताया कि उन्होंने अपनी मां से जो सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय सबक सीखा है वह एक इमरजेंसी फंड बनाने का है। कर्नाड ने कहा, "उनका मानना था कि जिस पैसे को खर्च नहीं किया जाता वह बचत होती है। ऐसी रकम वह इमरजेंसी के लिए अलग रखती थी।"


कर्नाड को याद है कि उनकी मां खर्च से अधिक बचत करती थी। उदाहरण के लिए, अगर उन्हें विकल्प दिया जाता था तो वह फ्लाइट लेने के बजाय ट्रेन से यात्रा करती थी और इससे होने वाली बचत को इमरजेंसी फंड में रखा जाता था।


इन दिनों अधिकतर फाइनेंशियल एडवाइजर मुश्किल स्थितियों के लिए एक इमरजेंसी फंड बनाने की सलाह देते हैं। कोरोना जैसे मुश्किल दौर में इससे मदद मिलती है जब नौकरी जाने या आमदनी कम होने की आशंका रहती है। अगर आपने अभी तक इमरजेंसी फंड नहीं बनाया है तो अब भी आप इसे सीमित संसाधनों के साथ बना सकते हैं।


सबक 2: बजट बनाएं और समझदारी से खर्च करें


मांओं के लिए मासिक खर्चों का बजट बनाना और खर्चों की निगरानी करना महत्वपूर्ण कार्य हैं। शीरोज की को-फाउंडर, सिद्धिका अग्रवाल को याद है कि उनकी मां मासिक खर्चों एक डायरी में लिखती थी। उस डायरी में वह ग्रॉसरी बिल, यूटिलिटी बिल जैसे खर्चों को लिखना कभी नहीं भूलती थी।


फाइनेंशियल मैनेजमेंट का यह मूलभूत पहलू अग्रवाल ने शुरुआत में ही देख लिया था। हालांकि, वह इसके बाद भी अपने खर्चों को लेकर लापरवाह रही। अग्रवाल ने बताया, "जब मैंने अपने क्रेडिट कार्ड बिल पर डिफॉल्ट किया तो मुझे उस चीज का महत्व समझ आया जो मेरी मां हर महीने करती थी। अब ऐप्स के साथ मुझे एक डायरी नहीं रखनी पड़ती और मैं अपने खर्चों की निगरानी कर सकती हूं। मैं बचत करना भी सुनिश्चित करती हूं।"


कोटक महिंद्रा AMC की चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर (डेट) और प्रोडक्ट्स की हेड, लक्ष्मी अय्यर को याद है कि उनकी मां अपनी आमदनी से अधिक खर्च नहीं करने की सलाह देती थी। अय्यर ने कहा, "लंबी अवधि में उनसे मिली सीख का खर्च करने की मेरी आदतों और इनवेस्टमेंट के फैसलों पर एक सकारात्मक असर पड़ा है।"


सबक 3: वित्तीय लक्ष्यों को तय करना और उन्हें पूरा करने के लिए निवेश करना


पुराने जमाने की महिलाओं ने इनवेस्टमेंट पर रिटर्न के लिहाज से अधिक नहीं सोचा था, लेकिन वे जानती थी कि हमें क्यों बचत करनी चाहिए। आसान शब्दों में इसे वित्तीय लक्ष्य कहा जा सकता है। कर्नाड उन कोशिशों और वित्तीय योजना पर जोर देती हैं जो एक घर खरीदने के लिए चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर आप होम लोन लेकर एक खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपको यह तय करना होगा कि कितनी शुरुआती रकम आपको देनी होगी और कितना होम लोन लेने की जरूरत है।"


म्यूचुअल फंड आपको सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू करने की सुविधा देते हैं जिससे आपको पांच, 10 वर्षों में एक तय रकम तक पहुंचने के लिए मासिक बचत करने में मदद मिलती है।


अय्यर को याद है कि उनकी मां किसी बड़ी खरीदारी के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करती थी। उन्होंने बताया, "इससे मुझे मार्केट में उतार-चढ़ाव के दौरान शांत रहने में वास्तव में मदद मिली।"


सबक 1: इनवेस्टमेंट को डायवर्सिफाइ करना


कर्नाड की मां की तरह अधिकतर महिलाएं फिक्स्ड डिपॉजिट में बचत करना या सेविंग्स एकाउंट में रकम रखना पसंद करती हैं। कर्नाड ने बताया, "उन्हें ऐसी बचत और निवेश पर कम रिटर्न मिल रहा था। मैंने उन्हें निवेश के अन्य जरियों और डायवर्सिफिकेशन के बारे में बताया।" इसके बाद वह अपने इनवेस्टमेंट को डायवर्सिफाइ करने पर सहमत हो गई।


सबक 2: डिजिटल गोल्ड स्कीम्स में निवेश करना


आमतौर पर महिलाएं फिजिकल गोल्ड कॉइन और ज्वैलरी में निवेश करना पसंद करती हैं। अग्रवाल ने कहा, "फिजिकल गोल्ड ज्वैलरी खरीदने पर 15-20 प्रतिशत मेकिंग चार्ज देना होता है। फिजिकल गोल्ड में निवेश करने से उनकी मां के निवेश पर वास्तविक रिटर्न मिलने के बजाय डेप्रिसिएशन का नुकसान हो रहा था। मैंने उन्हें सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश के फायदो के बारे में बताया और अब वह उसमें निवेश करती हैं जिससे कुछ रिटर्न मिलता है।"


इसी तरह अय्यर ने भी अपनी मां को फिजिकल गोल्ड के बजाय गोल्ड फंड में निवेश करने के लिए आश्वस्त किया जिसमें बैंक लॉकर की तरह स्टोरेज कॉस्ट नहीं होती।


अपनी मां को दें हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का उपहार


बूढ़े लोगों को मेडिकल सहायता की अक्सर जरूरत होती है और इस महामारी में पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस कवर होना बहुत महत्वपूर्ण है। अग्रवाल और कर्नाड दोनों ने अपनी मां के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदी है और समय के साथ इसका सम इंश्योर्ड भी बढ़ाया है।


सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।