Delhi Air Pollution: दिल्ली की जहरीली हवाओं से बढ़ रही हैं दिमागी समस्याएं, सोचने-समझने की क्षमता पर बढ़ा खतरा

Delhi Air Pollution: दिल्ली समेत देश के कई शहरों में प्रदूषण की वजह से हालात गंभीर हो गए हैं। दिल्ली सरकार ने एनजीटी में कहा है कि प्रदूषण की वजह से लोगों का दिमाग सुस्त हो गया है। बहुत से लोग भूलने की समस्या से जूझ रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे स्कूल जाने वाले बच्चों पर ज्यादा असर पड़ता है

अपडेटेड Apr 10, 2024 पर 1:05 PM
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Delhi Air Pollution: दिल्ली में प्रदूषण को लेकर NGT और दिल्ली सरकार गंभीर है।

Delhi Air Pollution: देश के कई शहरों में प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है। राजधानी दिल्ली के हालात बेहद खराब हैं। वायु प्रदूषण की इस बढ़ती समस्या से लोगों की मानसिक हालत बेहद खराब हो रही है। दिल्ली के लोगों में उदासी, चीजों को याद रखने से जुड़ी कठिनाइयां आ रही हैं। उनको जीवन की चुनौतियों से निपटने की क्षमता में कमी महसूस हो रही है। दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal -NGT) के सामने इन बातों का जिक्र किया है। ऐसे में कहा जा रहा है कि दिल्‍ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सरकार और एनजीटी दोनों ही गंभीर हैं।

बता दें कि NGT ने राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता में गिरावट पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) समेत कई प्राधिकरणों से जवाब मांगा था। NGT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है।

प्रदूषण को लेकर NGT गंभीर


दरअसल, एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें कहा गया था कि वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से भारत में मानसिक सेहत बिगड़ रही है। इसमें लोगो के भीतर उदासी छआई रहती है। वहीं बहुत से लोगों में भूलने की बीमारी बढ़ती जा रही है। जिससे लोगों को अपने जीवन में आई चुनौतियों से निपटने में कमी महसूस हो रही है। ऐसी कई समस्याएं पैदा हो रही है। इस रिपोर्ट को NGT ने संज्ञान में लिया। इस पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल थे।

आर्थिक रूप से कमजोर लोग ज्यादा परेशान

स्वास्थ्य विभाग की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वायु प्रदूषण से ग्रामीण, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों में मनोवैज्ञानिक संकट बढ़ा है। NGT ने सीपीसीबी के जवाब को ध्यान में रखते हुए कहा कि अमोनिया, सीसा, निकल, आर्सेनिक और बेंजो (ए) पाइरीन सहित कुछ वायु प्रदूषकों की निगरानी नहीं की जा रही। इसका नतीजा ये हुआ कि वायु प्रदूषण और बढ़ता जा रहा है।

वहीं एक स्टडी में ये भी कहा गया है कि वायु प्रदूषण का असर सबसे ज्यादा बच्चों पर पड़ता है। बच्चों के AQI का उनकी मैथमेटिकल क्षमताओं पर सीधा प्रभाव पड़ता है। प्रदूषण की वजह से कई समस्याएं पैदा होने लगती हैं।

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