अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में 5.8 तीव्रता का जोरदार भूकंप, इस साल का तीसरा बड़ा झटका

Earthquake in Andaman and Nicobar Islands: अंडमान निकोबार द्वीप समूह में जोरदार भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (National Centre for Seismology -NCS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र 69 किमी की गहराई में था। हालांकि अब तक कि जो खबर है उसके अनुसार किसी के हताहत की खबर नहीं है

अपडेटेड Jul 29, 2023 पर 9:00 AM
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Earthquake in Andaman and Nicobar Islands: इसी साल जनवरी में अंडमान निकोबार द्वीप समूह के अंडमान सागर में 4.9 तीव्रता का भूकंप आया था।

Earthquake in Andaman and Nicobar Islands: अंडमान-निकोबार आईलैंड में रात 12.53 बजे 5.8 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। ये झटके पोर्ट ब्लेयर के दक्षिण-पूर्व में 126 किमी की दूरी पर महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (National Centre for Seismology -NCS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र 69 किमी की गहराई में था। हालांकि अब तक कि जो खबर है उसके अनुसार किसी के हताहत की खबर नहीं है लेकिन देर रात अचानक से भूकंप आने से लोग डरे हुए हैं। लोगों के चेहरे पर भूकंप का डर साफ़ दिख रहा है।

वहीं अरुणाचल प्रदेश में शुक्रवार सुबह लगभग 8:50 बजे भूकंप आया था। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश के पैंगिन के उत्तर में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर स्केल पर उसकी तीव्रता 4.0 मापी गई थी। भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं आई थी। इससे पहले अरुणाचल के तवांग में 22 जुलाई को 3.3 तीव्रता का भूकंप आया था।

अंडमान निकोबार में जनवरी में भी आए थे भूकंप के झटके


इसी साल जनवरी में अंडमान निकोबार द्वीप समूह के अंडमान सागर में 4.9 तीव्रता का भूकंप आया था। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) के मुताबिक भूकंप 77 किलोमीटर की गहराई पर आया था। इसके अलावा इन द्वीपों पर इस साल मार्च में निकोबार क्षेत्र में आया था। इस भूकंप की तीव्रता 5 थी। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने कहा था कि भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई पर आया था। वहीं पिछले साल अंडमान और निकोबार द्वीप समूह ने 24 घंटों के दौरान 3.8 तीव्रता से लेकर 5 तीव्रता तक के 22 भूकंप झेले थे।

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जानिए कैसे आता है भूकंप

भूकंप के आने की मुख्य वजह धरती के अंदर प्लेटों का टकरना है। धरती के भीतर सात प्लेट्स होती हैं जो लगातार घूमती रहती हैं। जब ये प्लेटें किसी जगह पर आपस में टकराती हैं, तो वहां फॉल्ट लाइन जोन बन जाता है। फिर सतह के कोने मुड़ जाते हैं। सतह के कोने मुड़ने की वजह से वहां दबाव बनता है और प्लेट्स टूटने लगती हैं। इन प्लेट्स के टूटने से अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है। जिसकी वजह से धरती हिलती है और हम इसे भूकंप मानते हैं।

कितनी तीव्रता का भूकंप होता है खतरनाक?

वहीं रिक्टर स्केल पर 2.0 से कम तीव्रता वाले भूकंप को माइक्रो कैटेगरी में रखा जाता है और यह भूकंप महसूस नहीं किए जाते। रिक्टर स्केल पर माइक्रो कैटेगरी के 8,000 भूकंप दुनियाभर में रोजाना दर्ज किए जाते हैं। इसी तरह 2.0 से 2.9 तीव्रता वाले भूकंप को माइनर कैटेगरी में रखा जाता है। ऐसे 1,000 भूकंप प्रतिदिन आते हैं इसे भी सामान्य तौर पर हम महसूस नहीं करते।

वेरी लाइट कैटेगरी के भूकंप 3.0 से 3.9 तीव्रता वाले होते हैं, जो एक साल में 49,000 बार दर्ज किए जाते हैं। इन्हें महसूस तो किया जाता है लेकिन शायद ही इनसे कोई नुकसान पहुंचता है। लाइट कैटेगरी के भूकंप 4.0 से 4.9 तीव्रता वाले होते हैं जो पूरी दुनिया में एक साल में करीब 6,200 बार रिक्टर स्केल पर दर्ज किए जाते हैं। इन झटकों को महसूस किया जाता है और इनसे घर के सामान हिलते नजर आते हैं। हालांकि इनसे न के बराबर ही नुकसान होता है।

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