Get App

आर्टिकल 370 को हटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 2 अगस्त से करेगा सुनवाई

Article 370: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने 5 मई 2019 को पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा निरस्त कर दिया था और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख के रूप में विभाजित कर दिया था। केंद्र ने दलील दी कि ऐतिहासिक संवैधानिक कदम क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति, सुरक्षा और स्थिरता लेकर आया है, जो आर्टिकल 370 के लागू रहने के दौरान नहीं था

Akhileshअपडेटेड Jul 11, 2023 पर 11:47 AM
आर्टिकल 370 को हटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 2 अगस्त से करेगा सुनवाई
Article 370: जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 2 अगस्त से शुरू होगी

जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 (Article 370) को निरस्त करने के करीब चार साल बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ केंद्र सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार 11 जुलाई को सुनवाई की। आर्टिकल 370 को निरस्त करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने को चुनौती देने वाली IAS अधिकारी शाह फैसल द्वारा दायर याचिका सहित अन्य याचिकाओं पर पर सुनवाई की। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 2 अगस्त से शुरू होगी।

पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के 2019 के राष्ट्रपति आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं का मामला लगभग चार साल से शीर्ष अदालत में लंबित है। मार्च 2020 में जब मामला आखिरी बार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था, तो पांच-जजों की संविधान पीठ ने इस मुद्दे को सात जजों की एक बड़ी पीठ को सौंपने के याचिकाकर्ताओं के तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

संविधान के आर्टिकल 370 को निरस्त किए जाने का बचाव करते हुए केंद्र ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यह कदम उठाये जाने के बाद जम्मू-कश्मीर के पूरे क्षेत्र में अभूतपूर्व शांति, प्रगति और समृद्धि देखने को मिली है। केंद्र ने कहा कि आतंकवादियों द्वारा सड़कों पर की जाने वाली हिंसा और अलगाववादी नेटवर्क अब अतीत की बात हो चुकी है।

क्षेत्र की विशिष्ट सुरक्षा स्थिति का संदर्भ देते हुए केंद्र ने कहा कि आतंकवादी-अलगाववादी एजेंडा से जुड़ी सुनियोजित पथराव की घटनाएं साल 2018 में 1,767 थीं, जो घटकर 2023 में आज की तारीख में शून्य हो गई हैं। वहीं, सुरक्षाकर्मियों के हताहत होने के मामलों में 2018 की तुलना में 2022 में 65.9 प्रतिशत की कमी आई है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें