Gyanvapi Mosque Case: ज्ञानवापी परिसर के वीडियोग्राफी-सर्वे के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने से मिले कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक परीक्षण की मांग से जुड़ी अपील को वाराणसी की जिला अदालत ने खारिज कर दिया है। कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक परीक्षण के मामले में पिछले सप्ताह बहस पूरी हो गई थी।
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, ज्ञानवापी मस्जिद मामले में वाराणसी कोर्ट ने शुक्रवार को मस्जिद परिसर में कार्बन डेटिंग और 'शिवलिंग' की वैज्ञानिक जांच की मांग वाली हिंदू पक्ष की मांग को खारिज कर दिया।
हिंदू पक्ष के वकील मदन मोहन यादव ने कहा कि हमारी कार्बन डेटिंग की मांग को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि शिवलिंग के साथ कोई छेड़छाड़ ना हो, अभी इसकी आवश्यकता नहीं है। हम हाई कोर्ट में भी अपनी बात रखेंगे, क्योंकि विज्ञान की कसौटी पर जीवन जिया जा सकता है।
ज्ञानवापी परिसर में मिले कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक परीक्षण को लेकर 7 अक्टूबर को हिंदू पक्ष ने अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करते हुए दावा किया था कि वजूखाने में मिला शिवलिंग उनके वाद का हिस्सा है। हिंदू पक्ष के स्पष्टीकरण पर मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने अपना जवाब दाखिल कर दिया था।
मुस्लिम पक्ष के वकील मुमताज अहमद ने कहा था कि उन्होंने अदालत से कहा है कि परिसर में मिली आकृति की कार्बन डेटिंग नहीं करायी जा सकती। उन्होंने कहा, ‘‘दूसरा, हिंदू पक्ष तोड़-फोड़ की बात कर रहा है, जिससे आकृति नष्ट हो सकती है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने उसे संरक्षित रखने का आदेश दिया है। अगर कार्बन डेटिंग के नाम पर आकृति में तोड़ फोड़ की जाती है तो यह शीर्ष अदालत के आदेश की अवहेलना होगी।
बता दें कि सिविल जज सीनियर डिवीजन के आदेश पर पिछली मई में हुई ज्ञानवापी परिसर की वीडियोग्राफी सर्वे के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में एक लंबा और ऊपर से गोल पत्थर मिला था। हिंदू पक्ष का दावा है कि वह शिवलिंग है, जबकि मस्जिद इंतजामिया कमेटी का कहना है कि वह शिवलिंग नहीं बल्कि फौव्वारे का हिस्सा है।
उसकी दलील है कि मुगलकाल में बनी अनेक अन्य ऐसी मस्जिदें और दीगर इमारतें हैं, जिनके वजूखाने में इसी तरह के फौव्वारे लगे हैं। बहरहाल, हिन्दू पक्ष ने जिला अदालत से कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग जांच कराने की मांग की थी, ताकि यह पता लग सके कि वह पत्थर कितना पुराना है।