Cadbury Advertisement: वापस लौट आया है कैडबरी का वो आइकॉनिक क्रिकेट एडवर्टाइजमेंट, मगर इस बार नए ट्विस्ट के साथ

Cadbury का ये एड सिर्फ 90 के दशक के बच्चों को ही नहीं, बल्कि उस दौर की कई पीढ़ियों को बेहद पसंद था

अपडेटेड Sep 18, 2021 पर 8:39 PM
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आज भी आप और हम में से न जाने कितने लोगों को अपने बचपन के दौर के कई TV एडवर्टाइजमेंट याद होंगे और अगर आप 90 के दशक में जन्में हैं, तो आपको कैडबरी (Cadbury) का वो क्रिकेट एडवर्टाइजमेंट (Cricket Advertisement), तो जरूर ही याद होगा, जिसमें एक लड़की खिलाड़ी के छक्का मारने के बाद मैदान पर दौड़ती है और स्टेडियम के बीच एक बेहद अजीबोगरीब, लेकिन दिल को छू लेने वाला डांस करती है। कई लोग दूरदर्शन पर ODI मैच के बीच आने वाले कमर्शियल ब्रेक का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार किया करते थे, जो ओवर खत्म होने के बाद आया करता था।

कैडबरी का ये कमर्शियल एड सिर्फ 90 के दशक के बच्चों को ही नहीं, बल्कि उस दौर की कई पीढ़ियों को बेहद पसंद था। इसलिए एडवर्टाइजमेंट के रिलीज के लगभग तीन दशक बाद, कैडबरी के मालिक मोंडेलेज और ओगिल्वी एक बार फिर उस एड फिल्म को दोबारा लेकर आए हैं, मगर इस बार एक ट्विस्ट के साथ।



वो ट्विस्ट ये है कि, इस बार बाउंड्री पर शॉट खेलने वाला खिलाड़ी लड़का नहीं बल्कि एक लड़की है। दूसरी तरफ दर्शकों के बीच से सिक्योरिटी गार्ड को चखमा देकर ग्राउंड पर आने के बाद, मैच के दौरान वो दिल को झू लेने वाला डांस, लड़की के बजाए एक लड़का कर रहा है।

इस एड फिल्म को रिक्रिएट करने के बारे में  मोंडेलेज इंडिया के सीनियर डायरेक्टर अनिल विश्वनाथन ने स्टोरीबोर्ड को बताया, "ये ओगिल्वी में एक युवा क्रिएटिव था, जो इस आइडिया को लेकर आया था और हमें ये तुरंत पसंद आ गया। साफ तौर पर ये एड आइकॉनिक था।" वे कहते हैं, "ये समय के अनुसार है, खेल में महिलाओं की उपलब्धि और जीवन में उपलब्धि हासिल करने वाली महिलाओं के लिए जश्न मनाया जाना चाहिए।"


ऑरिजनल एडवर्टाइजमेंट ऐसे समय में आया, जब देश अहम बदलाव के दौर से गुजर रहा था। आर्थिक उदारीकरण के बाद के युग की अनिश्चितता के बावजूद, एड फिल्म ने एक तरह से देश के मूड को दिखाया, जो आशावान और उत्साह से भरा था।

पिछले और वर्तमान दौर के बीच तुलना करते हुए, पीयूष पांडे, जो ओगिल्वी के ग्लोबल क्रिएटिव और भारत के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं, कहते हैं, "उस समय, मूड उड़ान की आशावाद का था, अब उभरने की आशावाद का है…"

पांडे याद करते हैं कि कैसे ऑरिजनल एड म्यूजिक कंपोजर और भारतीय जैज़ के गॉडफादर लुइस बैंक्स के साथ बनाया गया था। गीत लिखने के बाद पांडे ने बैंक्स के साथ गाना रिकॉर्ड किया। पहला वर्जन अंग्रेजी में था। इसे रिकॉर्ड करने के बाद ही पांडे बैठ गए और हिंदी में एक वर्जन लिखने के लिए उसी स्कोर का इस्तेमाल किया और इसने बहुत बेहतर काम किया।

ओगिल्वी को कैडबरी के लिए एक वास्तविक समस्या का समाधान करना था। उस समय, कैडबरी डेयरी मिल्क बच्चों का एक पसंदीदा ब्रांड बन गया था, लेकिन वो चाहते थे कि बड़े लोगों तक भी इसकी मिठास पहुंचे और वे भी इस चॉकलेट का स्वाद चखें। शायद ये कहना गलत नहीं होगा कि इस एड ने कंपनी की इस चाह को भी पूरा कर दिया।

पांडे कहते हैं, "मेरा मानना था कि हम सब के अंदर एक बच्चा होता है और ये भावना इस एड के जरिए व्यक्त की गई थी। इसका असर भी कुछ ऐसा ही हुआ था।"



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