CBI ने दर्ज किया मुंबई में EPFO के 8 कर्मचारियों पर 18.97 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का केस, मास्टरमाइंड फरार

CBI की FIR के अनुसार, आठ आरोपियों में धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड, EPFO के कांदिवली दफ्तर में एक क्लर्क, चंदन कुमार सिन्हा शामिल है

अपडेटेड Jan 21, 2022 पर 2:19 PM
मुंबई में EPFO के 8 कर्मचारियों पर 18.97 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के मुंबई कार्यालय में तैनात आठ कर्मचारियों के खिलाफ कथित तौर पर एक कॉमन PF पूल से धोखाधड़ी निकासी के जरिए 18.97 करोड़ रुपए निकालने के चलते केस दर्ज किया है।

CBI की FIR के अनुसार, आठ आरोपियों में धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड, EPFO के कांदिवली दफ्तर में एक क्लर्क, चंदन कुमार सिन्हा शामिल है और उसके वरिष्ठ अभिजीत ओनेकर, शिव शंकर ममदी, उत्तम तगारे, विजय जरपे, दिलीप राठौड़, गणेश घायवत और सीमा बांकर, एक ही ब्रांच में EPFO के सभी कर्मचारी हैं।

CBI ने उन पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक कदाचार के लिए IPC की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से कहा कि सिन्हा अगस्त 2021 में EPFO धोखाधड़ी सामने आने के बाद से फरार है।


सिन्हा ने कथित तौर पर जरूरतमंद और ज्यादातर बेरोजगार प्रवासी श्रमिकों को 5,000 रुपए के रूप में कम कमीशन देकर एक्टिव बैंक अकाउंट और आधार डिटेल हासिल किए, और फिर मुंबई की 20 कंपनियों के कर्मचारियों के रूप में उनके नाम से पीएफ अकाउंट खोले, जो कि गैर-मौजूद भौतिक दावों (non-existent physical claims) को बनाने के लिए 10-15 साल पहले बंद हो गए थे।

सिन्हा ने बाद में 17.32 करोड़ रुपए के कम से कम 592 ऐसे फर्जी क्लेम पर कार्रवाई की, जबकि उनके साथी वनकर ने कथित तौर पर 4.34 करोड़ रुपए के 156 क्लेम का निपटारा किया और पैसे की हेराफेरी की। इन क्लेम को तब ब्रांच के दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से अप्रूव भी किया गया था।

EPFO के अनुसार, इसने 2019 से 2021 के बीच मुंबई में 20 डिएक्टिवेट कंपनियों के जरिए धोखाधड़ी के क्लेम के 833 मामलों का पता लगाया। CBI की FIR में नामित सभी आठ EPFO अधिकारियों को धोखाधड़ी में उनकी कथित संलिप्तता के लिए कार्यालय से हटा दिया गया है।

EPFO ने CBI को दी अपनी शिकायत में कहा, "जालसाजों का काम फर्जी पीएफ अकाउंट बनाना, हर एक अकाउंट में लगभग 2 लाख रुपए से 4 लाख रुपए के बीच क्रेडिट दिखाना और फर्जी क्लेम दर्ज करके इन अकाउंट से पैसे निकालना था। निवेश में नुकसान को ध्यान में रखते हुए, धोखेबाजों के हाथों कॉर्पस को गलत तरीके से नुकसान 18.97 करोड़ रुपये की मूल राशि से कई गुना ज्यादा है।"

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