₹1 लाख का लोन लेकर शुरू किया काम, अब सालाना ₹8 लाख की कमाई! मिलिए छत्तीसगढ़ की 'लखपति दीदी' दिलमति से

Lakhpati Didi Dilmati Chhattisgarh: दिलमति की कहानी देश के ग्रामीण इलाकों में आ रहे बड़े बदलाव की मिसाल है। दिलमति ने एक सफल व्यवसाय खड़ा करके न केवल अपने परिवार को आर्थिक तंगी से बाहर निकाला, बल्कि वे छत्तीसगढ़ की 'लखपति दीदी' बनकर उभरी हैं। उनकी इस सफलता ने उनके गांव के कई अन्य परिवारों को भी इस बिजनेस से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है। आइए जानते हैं दिलमति के संघर्ष और उनकी कामयाबी की पूरी कहानी

अपडेटेड Jul 18, 2026 पर 4:00 PM
दिलमति की जिंदगी में यू-टर्न तब आया जब वे स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं

Chhattisgarh Lakhpati Didi Dilmati Success Story: पारंपरिक खेती से जैसे-तैसे गुजारा करने से लेकर आज सालाना ₹8 लाख तक की कमाई करने तक, छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले की दिलमति की कहानी देश के ग्रामीण इलाकों में आ रहे बड़े बदलाव की मिसाल है। दिलमति ने एक सफल सुअर पालन व्यवसाय खड़ा करके न केवल अपने परिवार को आर्थिक तंगी से बाहर निकाला, बल्कि वे छत्तीसगढ़ की 'लखपति दीदी' बनकर उभरी हैं।

उनकी इस सफलता ने उनके गांव के कई अन्य परिवारों को भी इस बिजनेस से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है। आइए जानते हैं दिलमति के संघर्ष और उनकी कामयाबी की पूरी कहानी।

कौन हैं लखपति दीदी दिलमति?


दिलमति छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बलरामपुर जिले के लादुवा गांव की रहने वाली हैं। वे स्थानीय 'मां दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह' (SHG) की एक सक्रिय सदस्य हैं। कुछ साल पहले तक दिलमति का परिवार पूरी तरह से पारंपरिक खेती पर निर्भर था। सीमित आय के कारण उन्हें घर चलाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।दिलमति की जिंदगी में यू-टर्न तब आया जब वे स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। यहां उन्हें सरकार द्वारा समर्थित आजीविका के अवसरों और योजनाओं के बारे में जानकारी मिली।

₹1 लाख के लोन से ऐसे खड़ा किया साम्राज्य

समूह के अधिकारियों और जानकारों से प्रोत्साहन मिलने के बाद दिलमति ने एक साहसिक कदम उठाया। दिलमति ने स्वयं सहायता समूह (SHG) के जरिए ₹1 लाख का लोन लिया। इस रकम से उन्होंने सुअर पालन का काम शुरू करने के लिए पड़ोसी राज्य झारखंड से 10 सुअर खरीदे।

धीरे-धीरे उनका यह बिजनेस मुनाफे में बदल गया। उनके फार्म में प्रत्येक मादा सुअर 9 से 10 बच्चों (पिगलेट्स) को जन्म देती है, और एक-एक बच्चा बाजार में करीब ₹5,000 में बिकता है। आज के समय में दिलमति के पास 9 मादा सुअर हैं, जिससे उनकी सालाना आमदनी ₹7 लाख से ₹8 लाख के बीच हो जाती है।

कमाई से तैयार किए कमाई के नए साधन

दिलमति केवल सुअर पालन तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने इस बिजनेस से होने वाली कमाई को समझदारी से दूसरी जगहों पर री-इन्वेस्ट किया:

  1. उन्होंने सुअरों के रहने के लिए एक पक्का और आधुनिक शेड बनवाया है।
  2. खेती को आसान बनाने के लिए धान और मक्का की थ्रेशिंग (मिसाई) मशीनें खरीदीं।
  3. अपनी खेती में ड्रिप इरिगेशन तकनीक को अपनाया और बड़े पैमाने पर जैविक सब्जियों की खेती शुरू की।
  4. इन सब अलग-अलग जरियों से अब उनके परिवार के पास कमाई के कई माध्यम तैयार हो चुके हैं।

गांव की महिलाओं के लिए बनीं रोल मॉडल, प्रशासन भी करेगा मदद

दिलमति की इस बड़ी सफलता ने लादुवा गांव की तस्वीर बदल दी है। दिलमति की कामयाबी को देखकर गांव के करीब 10 से 15 अन्य परिवारों ने भी सुअर पालन को अपनी आजीविका के रूप में अपना लिया है। दिलमति खुद अब दूसरी महिलाओं को नियमित बचत करने, समूहों से जुड़ने और लोन लेकर अपना खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए प्रेरित करती हैं।

दिलमति की इस उपलब्धि को देखते हुए बलरामपुर जिला प्रशासन अब इस तरह की आजीविका पहलों को बड़े पैमाने पर विस्तार देने की योजना बना रहा है। बलरामपुर के कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के मुताबिक, प्रशासन अब एक 'गोट क्लस्टर प्रोजेक्ट' तैयार कर रहा है। इसके तहत और भी अधिक महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाने और ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए उन्नत नस्ल की बकरियां उपलब्ध कराई जाएंगी।

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