Chandrayaan-3 का बजट ओपनहाइमर और आदिपुरुष से भी कम, दुनिया हैरान

इंडिया चांद की सतह पर व्हीकल (प्रज्ञान रोवर) उतारने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। अब तक दुनिया के सिर्फ तीन देश ऐसा करने में कामयाब रहे हैं। इनमें अमेरिका, रूस और चीन शामिल हैं। इंडिया चांद के दक्षिणी धुव्र पर अपना व्हीकल उतारने वाला पहला देश होगा। चंद्रयान-3 मिशन की सबसे बड़ी बात यह है कि दुनिया की दूसरी अंतरिक्ष एजेंसियों के मुकाबले ISRO के इस मिशन का बजट नाममात्र का है

अपडेटेड Aug 23, 2023 पर 4:24 PM
2022 में अंतरिक्ष प्रोग्राम के लिए इंडिया का बजट 1.93 अरब डॉलर था। इस मामले में इंडिया दुनिया में सातवें स्थान पर था। इसके मुकाबले अमेरिका के अंतरिक्ष प्रोग्राम का बजट 61.97 अरब डॉलर था।

Chandrayaan-3 मिशन पर पूरी दुनिया की नजरें लगी हैं। 23 अगस्त की शाम इंडिया तब इतिहास रचेगा जब विक्रम लैंडर चांद पर उतरेगा। इस मिशन के सफल रहने पर इंडिया चांद की सतह पर व्हीकल (प्रज्ञान रोवर) उतारने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। अब तक दुनिया के सिर्फ तीन देश ऐसा करने में कामयाब रहे हैं। इनमें अमेरिका, रूस और चीन शामिल हैं। इंडिया चांद के दक्षिणी धुव्र पर अपना व्हीकल उतारने वाला पहला देश होगा। चंद्रयान-3 मिशन की सबसे बड़ी बात यह है कि दुनिया की दूसरी अंतरिक्ष एजेंसियों के मुकाबले ISRO के इस मिशन का बजट नाममात्र का है। यह हॉलीवुड और बॉलीवुड की फिल्मों के बजट से भी कम है। हाल में आई फिल्में ओपनहाइमर और बार्बी का बजट चंद्रयान-3 मिशन से ज्यादा था।

चांद के मिशन की सफलता का अनुपात करीब 50 फीसदी

चांद का इसरो का यह तीसरा मिशन है। पहला मिशन चंद्रयान-1 सफल था। इससे चांद पर पानी की मौजूदगी का पता लगाने में मदद मिली थी। लेकिन, चंद्रयान-2 का मिशन असफल हो गया था। इसकी वजह यह थी कि चांद के सतह पर उतरने से ठीक पहले विक्रम लैंडर से इसरो का संपर्क टूट गया था। दुनिया में अंतरिक्ष मिशन के सफल होने का अनुपात 50 फीसदी से थोड़ा ही ज्यादा है। चांद के कुल 78 मिशन में से 35 सफल रहे हैं। इनमें से तीन अब भी ऑपरेशनल हैं।


यह भी पढ़ें : Chandrayaan-3: चंद्रयान मिशन पर पूरी दुनिया की नजर, सफल लैंडिंग के बाद तकनीक खरीदने की मच सकती है होड़

अमेरिका का अंतरिक्ष बजट इंडिया से 3111 फीसदी ज्यादा

इंडिया के चंद्रयान मिशन का बजट दूसरे देशों के अंतरिक्ष मिशन के मुकाबले बहुत कम है। 2022 में अंतरिक्ष प्रोग्राम के लिए इंडिया का बजट 1.93 अरब डॉलर था। इस मामले में इंडिया दुनिया में सातवें स्थान पर था। इसके मुकाबले अमेरिका के अंतरिक्ष प्रोग्राम का बजट 61.97 अरब डॉलर था। यह इंडिया के बजट के मुकाबले 3111 फीसदी ज्यादा है। इससे पहले इसरो का मंगलयान या मार्स आर्बिटर मिशन मंगल के अब तक के सभी मिशन में सबसे सस्ता था। इंडिया का यह मिशन सफल था। खास बात यह है कि इंडिया ने पहली ही कोशिश में इस मिशन का कामयाब बनाया था।

इन फिल्मों का बजट चंद्रयान-3 मिशन से ज्यादा

चंद्रयान-3 मिशन पर भी यह बात लागू होती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चंद्रयान-3 मिशन पर सिर्फ 615 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसकी तुलना हाल में आई कई फिल्मों के बजट से की जा सकती है। हॉलीवुड की मशहूर फिल्म Oppenheimer का बजट करीब 813 करोड़ रुपये था। Mission Impossible: Dead Reckoning बनाने पर 2,411 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। यहां तक की बॉलीवुड की फिल्म आदिपुरुष का बजट भी करीब 700 करोड़ रुपये था। इसरो की इस उपलब्धि से दुनिया हैरान है।

अमेरिका और रूस के मिशन का बजट

दूसरे देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के चांद मिशन के मुकाबले चंद्रयान-3 का बजट मामूली है। दो दिन पहले क्रैश हुए रूस के Luna-25 का बजट 19-20 करोड़ रुपये था। यह रुपये में करीब 1,660 करोड़ रुपये है। अमेरिकी स्पेस एंजेसी NASA के अपने मून एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम Artemis पर 93 अरब डॉलर खर्च करने का अनुमान है। चंद्रयान -2 का बजट करीब 978 करोड़ रुपये था। इसका मतलब है कि चंद्रयान-3 का बजट चंद्रयान-2 से भी कम है।

कम खर्च में शानदार उपलब्धि का इसरो का ट्रैक रिकॉर्ड

ISRO की खासियत यह है कि उसने बहुत कम खर्च में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। अब तक इस स्पेस एजेंसी ने 124 स्पेसक्राफ्ट मिशन कंडक्ट किए हैं और 92 लॉन्च मिशन को अंजाम दिए हैं। इंडिया ने इसरो को गगनयान मिशन की भी जिम्मेदारी दी है, जिस पर काम चल रहा है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।