कोरोना के मामले लगातार बढ़ने के कारण बहुत सी कंपनियों ने वर्क शिफ्ट्स को कम करने के साथ ही वर्किंग आवर्स भी घटाने का फैसला किया है। बहुत से राज्यों में लॉकडाउन घोषित होने से आवाजाही भी मुश्किल हो गई है।

पिछले वर्ष कोरोना के फैलने पर देश भर में लॉकडाउन लगाया था। इस बार बहुत से राज्यों में नाइट कर्फ्यू, वीकेंड पर या पूरी तरह लॉकडाउन घोषित किया गया है जिससे लोगों की आवाजाही को कम कर कोरोना पर लगाम लगाई जा सके।

मनीकंट्रोल ने इससे पहले रिपोर्ट दी थी कि मारुति सुजुकी अपने गुरूग्राम और मानेसर के प्लांट्स में शिफ्ट्स की संख्या घटाने पर विचार कर रही है। कंपनियों की तरह ही इंडियन बैंकिंग एसोसिएशन ने भी बैंकों में स्टाफ की उपस्थिति आधी करने और वर्किंग आवर्स घटाने का फैसला किया है।

टीमलीज की को-फाउंडर और एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, ऋतुपर्णा चक्रवर्ती ने बताया कि अधिकतर कंपनियां और मैन्यफैक्चरिंग प्लांट बहुत कम कर्मचारियों के साथ चल रहे हैं। इस वजह से वर्किंग शिफ्ट्स में कमी करने से छंटनी होने की संभावना नहीं है।

उन्होंने कहा, "पिछले वर्ष के विपरीत कंपनियों को अब चलाने की अनुमति दी गई है। पिछले वर्ष बहुत सी वर्कफोर्स अपने शहरों और गांवों में लौट गई थी और लॉकडाउन हटने के बाद भी सभी लोग वापस नहीं आए थे। वर्क शिफ्ट्स में कमी करने का कारण इस संक्रमण का बहुत तेजी से फैलना और बहुत से वर्कर्स और एंप्लॉयर्स का इसकी चपेट में आना है।"

चक्रवर्ती ने बताया, "वर्क शिफ्ट्स में कमी होने से हमें छंटनी किए जाने की उम्मीद नहीं है क्योंकि स्टाफ की संख्या पहले ही कम है और वर्कर्स को खोजना और रिक्रूट करना आसान नहीं है। इसके अलावा राज्य सरकारों की ओर से घोषित लॉकडाउन कम अवधि के हैं।"

इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर, सुचिता दत्ता ने कहा कि शिफ्ट में कटौती करने का कारण वर्कर्स और एंप्लॉयर्स की सुरक्षा है। पिछले वर्ष के लॉकडाउन के अनुभव के बाद आपात स्थितियों के लिए कंपनियों की तैयारी इस बार पहले से बेहतर है।

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