Delhi 'Spurious' Drugs: दिल्ली सरकार अब एक नई मुसीबत में फंसती नजर आ रही है। सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की जा रही एक दवा अपने टेस्ट में फेल हो गई है। इस दवा का नाम सोडियम वैल्प्रोएट (Sodium valproate) है। मिर्गी के मरीजों को यह दवा दी जाती है। यह दवा लैब टेस्ट के मानकों में खरी नहीं उतरी है। जांच के दौरान इसे Not of standard quality’ यानी इसकी गुणवत्ता बेहद घटिया निकली है। इसे नकली दवा घोषित किया गया है। इस मामले में दिल्ली के उपराज्यपाल L G सक्सेना ने CBI जांच की सिफारिश की है।
बता दें कि पिछले हफ्ते दिल्ली के उप राज्यपाल विनय सक्सेना ने खराब गुणवत्ता की दवा के मामले में CBI जांच की सिफारिश की थी। करीब पांच दवाएं ऐसी थीं। जिनके सैंपल लैब टेस्ट में फेल साबित हुए थे। इसके बाद दिल्ली सरकार ने सभी सरकारी अस्पतालों में लैब टेस्ट में असफल हुई दवाओं को जब्त कर मरीजों के इस्तेमाल के लिए ना देने के आदेश जारी किए थे।
ये दवाएं टेस्ट में हुईं फेल
एक अधिकारी ने बताया कि यह रिपोर्ट 22 दिसंबर को चंडीगढ़ के एक सरकारी लैब ने जारी की है। अधिकारियों के अनुसार जो दवाएं खराब गुणवत्ता की पाई गई है, उनमें सेफैलेक्सिन भी शामिल है, जो फेफड़ों और मूत्र के रास्ते के संक्रमण के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है। डेक्सामेथासोन (Dexamethasone) को टेस्ट में फेल बताया गया है। इस दवा का इस्तेमाल फेफड़ों, जोड़ों में सूजन और शरीर में सूजन को ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। Levetiracetam भी टेस्ट में फेल हो गई है। यह मिर्गी और एंजाइटी में इस्तेमाल की जाती है। इसके साथ ही Amlodepin भी टेस्ट में फेल हो गई है। इसे हाइपरटेंशन में इस्तेमाल किया जाता है। कुल मिलाकर 5 दवाएं टेस्ट में फेल हो गई हैं।
इन अस्पतालों से सैंपल किए गए एकत्र
दवाओं के सैंपल तीन अस्पतालों, IHBAS, लोक नायक और दीन दयाल उपाध्याय से एकत्र किए गए है। यहां लाखों मरीज इलाज कराने आते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ड्रग कंट्रोलर ने 86 सैंपल एकत्र किए। वहीं, मंत्री सौरभ भारद्वाज ने स्वास्थ्य सचिव को उन पांच दवाओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दिए हैं, जो गुणवत्ता मानक परीक्षण में फेल हो गईं थी।