द्रौपदी मूर्मू (Droupadi Murmu) ने भारत के राष्ट्रपति पद का चुनाव जीत लिया है। वह अब देश की 15वीं राष्ट्रपति और इस पद पर पहुंचने वाली पहली आदिवासी महिला होंगी। NDA से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने तीसरे दौर की मतगणना के बाद कुल वैध मतों का 50% का आंकड़ा पार कर लिया। हालांकि उनकी जीत का अभी औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है।
विपक्ष की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने अपनी हार स्वीकार कर ली है और द्रौपदी मूर्मू को उनकी जीत पर बधाई दी। उन्होंने कहा, "मैं राष्ट्रपति चुनाव 2022 में द्रौपदी मुर्मू को उनकी जीत पर बधाई देता हूं। देश को उम्मीद है कि गणतंत्र के 15वें राष्ट्रपति के रूप में वे बिना किसी भय या पक्षपात के संविधान के संरक्षक के रूप में कार्य करेंगी।"
राष्ट्रपति चुनाव में जीत तय होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने द्रौपदी मुर्मू से उनके आवास पर जाकर मुलाकात की। PM मोदी ने कहा, "भारत ने इतिहास लिखा है। जब भारत आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, पूर्वी भारत के एक सुदूर हिस्से में पैदा हुई एक आदिवासी समुदाय की बेटी को राष्ट्रपति चुना गया है। द्रौपदी मुर्मू को बधाई।"
वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें बधाई देते हुए कहा, "राष्ट्रपति चुनाव में प्रभावी जीत दर्ज करने पर द्रौपदी मुर्मू को बधाई। वे गांव, गरीब, वंचितों के साथ-साथ झुग्गी-झोपड़ियों में भी लोक कल्याण के लिए सक्रिय रहीं हैं। आज वे उनके बीच से निकल कर सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचीं। यह भारतीय लोकतंत्र की ताकत है।"
संघर्षों भरा रहा है द्रौपदी मूर्मू का जीवन
बता दें कि झारखंड (Jharkhand) की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) को 21 जून को NDA का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार (presidential nominee) घोषित किया गया था।
ओडिशा की रहने वाली और संथाल समुदाय में जन्मीं मुर्मू ने 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत में एक पार्षद के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया और वह साल 2000 में ओडिशा सरकार में मंत्री बनीं। बाद में उन्होंने 2015 में झारखंड के राज्यपाल पद की जिम्मेदारी भी संभाली।
रायरंगपुर से दो बार विधायक रहीं मुर्मू ने 2009 में तब भी अपनी विधानसभा सीट पर कब्जा जमाया था, जब BJD ने राज्य के चुनावों से कुछ हफ्ते पहले BJP से नाता तोड़ लिया था। इसमें मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी BJD ने जीत दर्ज की थी।
रायरंगपुर से दो बार विधायक रहीं मुर्मू ने 2009 में तब भी अपनी विधानसभा सीट पर कब्जा जमाया था, जब BJD ने राज्य के चुनावों से कुछ हफ्ते पहले BJP से नाता तोड़ लिया था। इसमें मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी BJD ने जीत दर्ज की थी।
20 जून 1958 को जन्मीं मुर्मू झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनने का गौरव भी रखती हैं।
बेहद पिछड़े और दूरदराज के जिले से ताल्लुक रखने वालीं मुर्मू ने गरीबी और दूसरी समस्याओं से जुझते हुए भुवनेश्वर के रमादेवी महिला कॉलेज से आर्ट्स में ग्रेजुएशन किया और ओडिशा सरकार के सिंचाई और बिजली विभाग में एक जूनियर असिस्टेंट के रूप में अपना करियर शुरू किया था।
मुर्मू को 2007 में ओडिशा विधानसभा की तरफ से साल के सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके पास ओडिशा सरकार में परिवहन, वाणिज्य, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे मंत्रालयों को संभालने का अनुभव है।
दोनों बेटों और पति को खोया
मुर्मू बीजेपी की ओडिशा इकाई की अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष और बाद में अध्यक्ष भी रहीं। उन्हें 2013 में बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी (ST मोर्चा) के सदस्य के रूप में भी नामित किया गया था।
मुर्मू का विवाह श्याम चरण मुर्मू से हुआ और दंपती के तीन संतान- दो बेटे और एक बेटी हुईं। मुर्मू का जीवन व्यक्तिगत त्रासदियों से भरा रहा है, क्योंकि उन्होंने अपने पति और दोनो बेटों को खो दिया है। उनकी बेटी इतिश्री की शादी गणेश हेम्ब्रम से हुई है।