इंडिया कीमतों पर अल-नीनो के असर से निपटने में सक्षम है, CEA ने जताया भरोसा

नागेश्वरन ने कहा कि इंडिया से गुड्स का एक्सपोर्ट 450 अरब डॉलर पर स्थिर बना हुआ है। इसकी वजह ग्लोबल इकोनॉमी में आई सुस्ती है। सर्विसेज का एक्सपोर्ट 350 अरब डॉलर है। यह 25-30 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। इससे इंडिया के सर्विस सेक्टर की मजबूती का पता चलता है

अपडेटेड Jun 15, 2023 पर 2:16 PM
नागेश्वरन ने कहा कि अमेरिकी केंद्र बैंक फेडरल रिजर्व ने इंटरेस्ट रेट को लेकर सख्ती जारी रहने के संकेत दिए हैं। इससे पता चलता है कि अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ सकते हैं।

चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (CEA) वी अनंत नागेश्वरन (V Anantha Nageswaran) ने कहा है कि इंडिया अल-नीनो के कीमतों पर पड़ने वाले असर से निपटने में सक्षम है। उन्होंने FICCI के एक कार्यक्रम में इस बारे में बताया। इस साल मानसून की बारिश पर अल-नीनो के असर का अनुमान जताया गया है। उन्होंने कहा कि इंडिया से गुड्स का एक्सपोर्ट 450 अरब डॉलर पर स्थिर बना हुआ है। इसकी वजह ग्लोबल इकोनॉमी में आई सुस्ती है। सर्विसेज का एक्सपोर्ट 350 अरब डॉलर है। यह 25-30 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। इससे इंडिया के सर्विस सेक्टर की मजबूती का पता चलता है।

Federal Reserve बढ़ा सकता है इंटरेस्ट रेट

उन्होंने कहा कि अमेरिकी केंद्र बैंक फेडरल रिजर्व ने इंटरेस्ट रेट को लेकर सख्ती जारी रहने के संकेत दिए हैं। इससे पता चलता है कि अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि मीडियम टर्म में एनर्जी सेक्टर में कोल, ऑयल और गैस की अहमियत बनी रहेगी। हालांकि, हमें एनर्जी के पारंपरिक स्रोतों की जगह नए ऑप्शंस के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने पर जोर देना होगा।


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अल-नीनो की वजह से कम हो सकती है बारिश

अल-नीनो के चलते मानसून में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इसका सीधा असर इंडिया में खाद्यान्न से लेकर फल-सब्जियों के उत्पादन पर पड़ेगा। आज भी इंडिया में कृषि काफी हद तक मानसून की बारिश पर निर्भर है। खासकर खरीफ की फसलों के लिए अच्छी बारिश जरूरी है। बारिश कम होने पर फसलों का उत्पादन घट सकता है। इससे उनकी कीमतें बढ़ सकती हैं।

कम बारिश हुई तो कीमतें बढ़ सकती हैं

खाद्यान्न और फल-सब्जियों की कीमतें बढ़ने से रिटेल इनफ्लेशन बढ़ सकता है। RBI और सरकार की बहुत कोशिशों के बाद इनफ्लेशन काबू में आता दिख रहा है। मई में रिटेल इनफ्लेशन 4.25 फीसदी रहा। अप्रैल में यह 4.7 फीसदी था। पिछले कुछ महीनों से रिटेल इनफ्लेशन में लगातार कमी आ रही है। हालांकि, RBI का टारगेट इसे 4 फीसदी पर लाने की है। इस महीने की शुरुआत में RBI ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में कहा था कि इनफ्लेशन पर उसकी करीबी नजर बनी रहेगी।

सरकार बरत रही सावधानी

सरकार अल-नीनी के असर को देखते हुए अभी से सावधानी बरत रही है। वह मानसून की बारिश पर करीब नजर रखना चाहती है। हालांकि, मानसून इस बार करीब एक हफ्ते देर से केरल पहुंचा। लेकिन, वैज्ञानिकों का कहना है कि देर से पहुंचने के बावजूद इसकी बारिश सामान्य रह सकती है। धान की फसल की बुआई के लिए मानसून की अच्छी बारिश जरूरी है।

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