भारत की इकोनॉमिक परफॉर्मेंस मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में लड़खड़ाती नजर आई। इस साल के शुरू में जारी आंकड़ों के मुताबिक, तीसरी तिमाही में कंजम्प्शन और कैपिटल एक्सपेंडिचर में जहां तेजी देखने को मिली, वहीं जीएसटी सेल्स और मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में सुस्ती नजर आई। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के सीनियर एनालिस्ट पारस जसराज ने बताया, 'वित्त वर्ष 2025 में जीडीपी ग्रोथ 6.5 पर्सेंट रहने का अनुमान है। इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट में गतिविधियों में मामूली सुधार दिख रहा है, जबकि नवंबर 2024 में कोर सेक्टर की ग्रोथ 4 महीने के उच्च स्तर पर है। वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में सरकारी कैपिटल एक्सपेंडिचर के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है और निवेश से जुड़ी मांग को भी सहारा मिलेगा।'
दिसंबर में लगातार 10वें महीने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स कलेक्शन 1.7 लाख करोड़ रुपये के ऊपर रहा, जबकि ग्रोथ की रफ्तार और घटकर 7.3 पर्सेंट हो गई। हालांकि, मंथली कलेक्शन पिछले महीने के मुकाबले 3 पर्सेंट ज्यादा रहा, लेकिन अक्टूबर-दिसंबर के दौरान ग्रोथ की रफ्तार दिसंबर 2023 के मुकाबले कम रही।
अर्न्स्ट एंड यंग इंडिया में टैक्स पार्टनर सौरभ अग्रवाल ने बताया, 'फेस्टिव सीजन के बाद के ट्रेंड्स की वजह से 2024 की चौथी तिमाही में जीएसटी कलेक्शन में थोड़ी सुस्ती देखने को मिली, जो शॉर्ट टर्म में इकोनॉमी में सुस्ती की तरफ संकेत करता है। वित्त वर्ष 2025 की तिमाही में ग्रॉस कलेक्शन 8.3 पर्सेंट रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में यह आंकड़ा 8.9 पर्सेंट था।'
PMI डेटा भी काफी उत्साजनक नहीं रहा था। दिसंबर में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि भी 12 महीने के निचले स्तर यानी 56.4 पर बंद हुई। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि औसतन 56.8 रही, जो पिछली चार तिमाहियों में सबसे कम है। सितंबर 2024 तिमाही में यह आंकड़ा 57.4 था। मौजूदा फिस्कल ईयर के पहले 3 महीनों में यह आंकड़ा 58.2 था।
दिसंबर में कोयले प्रोडक्शन में भी गिरावट आई और यह ग्रोथ 5.3 पर्सेंट रही। इससे पिछले महीने यह आंकड़ा 7.2 पर्सेंट रहा, जबकि अक्टूबर में प्रोडक्शन ग्रोथ 7.4 पर्सेंट थी। हालांकि, सितंबर 2024 तिमाही में कोयले की प्रोडक्शन ग्रोथ और कमजोर रही थी।