फाइनेंस मिनिस्ट्री को उम्मीद है कि फूड इनफ्लेशन अगले दो-तीन महीने में कम हो जाएगा। मिनिस्ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि जिन वजहों से फूड इनफ्लेशन में बढ़ोतरी हुई है, उन्हें दुरुस्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'आने वाले समय में इनफ्लेशन (खास तौर पर फूड इनफ्लेशन) में बढ़ोतरी पर अंकुश लग सकता है।' उनका कहना था कि महंगाई को काबू में करने के लिए केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक की तरफ से किए गए उपायों का असर देखने को मिलेगा।
जुलाई में खुदरा महंगाई दर (headline retail inflation) 15 महीने के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी और यह रिजर्व बैंक के तय लक्ष्यों से काफी ज्यादा यानी 7.44 पर्सेंट हो गई थी। महंगाई दर में बढ़ोतरी की मुख्य वजह सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल थी।
इनफ्लेशन को रोकने के लिए खर्च बढ़ाने से जुड़ी योजनाओं के बारे में अधिकारी का कहना था, 'अभी ज्यादा खर्चों की बात नहीं होनी चाहिए। अभी मौजूदा फाइनेंशियल ईयर का आधा समय भी खत्म नहीं हुआ है। खर्च कै पैटर्न के बारे में तब तक कोई राय नहीं बनाई जानी चाहिए, जब तक बजट से पहले की मीटिंग खत्म नहीं हो जाती।'
जुलाई में सीपीआई इनफ्लेशन 7.44 रहने की मुख्य वजह खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी थी। इस दौरान खाद्य पदार्थों की कीमतों में 11.51 पर्सेंट की बढ़ोतरी रही। फूड बास्केट में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी सब्जियों की कीमतों में देखने को मिली और बढ़ोतरी का यह आंकड़ा 37.34 पर्सेंट रहा।
इसके बाद दाल और बाकी अनाजों में तेजी रही। संबंधित अवधि में फल, मांस और मछली की कीमतों में काफी कम बढ़ोतरी हुई। ऑयल सेगमेंट में 16.80 पर्सेंट का डीफ्लेशन दर्ज किया गया। पिछले हफ्ते प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका के बाद सरकार इसकी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए तुरंत सक्रिय हो गई थी।