फाइनेंस मिनिस्ट्री फाइनेंशियल ईयर 2024 की दूसरी छमाही में सरकार के बॉरोइंग प्लान में कोई बदलाव नहीं करेगी और मार्च में तय प्लान के मुताबिक 6.55 करोड़ रुपये जुटाएगी। मामले से वाकिफ सूत्रों ने मनीकंट्रोल को बताया कि हालांकि, अगर रेवेन्यू और डेफिसिट फाइनेसिंग के दूसरे स्रोत के जरिये गुंजाइश बनती है, तो बाद में इस रकम को कम किया जा सकता है। केंद्र सरकार की योजना वित्त वर्ष 2023-24 में बॉन्ड की बिक्री के जरिये कुल 15.43 लाख करोड़ रुपये जुटाने की है। इनमें से 8.88 लाख करोड़ उधार इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में लिए जा रहे हैं।
बॉरोइंग शेड्यूल के मुताबिक, सरकार अपने फिस्कल डेफिसिट की फाइनेसिंग के लिए हर हफ्ते बॉन्ड बेचती है। अक्टूबर 2023-मार्च 2024 की फाइनेसिंग को लेकर ऐलान सितंबर के आखिरी तक किया जाएगा। अगले 6 महीनों की बॉरोइंग कैलेंडर तय करने के लिए फाइनेंस मिनिस्ट्री और रिजर्व बैंक के अधिकारी सितंबर के आखिरी हफ्ते में बैठक करेंगे।
इकनॉमी के लिए ब्याज दरें तय करने में सरकार की मार्केट बॉरोइंग की अहम भूमिका होती है। अगर सरकार ने काफी ज्यादा उधारी ले रखी है, तो इससे कंपनियों के लिए फंड की उपलब्धता कम हो जाती है और लोन लेन की लागत (बॉरोइंग कॉस्ट) बढ़ जाती है। इस वजह से सरकार की बॉरोइंग में किसी भी तरह की कटौती को सकारात्मक संकेत माना जाता है।
स्मॉल सेविंग कलेक्शन के आधार पर फैसला
हाल के हफ्तों में इस बात को लेकर अटकलों का बाजार गर्म रहा है कि अक्टूबर 2023-मार्च 2024 में सरकार की उधारी कम रहेगी। सूत्रों के मुताबिक, हालांकि फाइनेंस मिनिस्ट्री 2023-24 की दूसरी छमाही के लिए बॉन्ड कैलेंडर जारी करने के दौरान बॉन्ड मार्केट को उधार की राशि में कटौती से जुड़ा कोई संकेत नहीं देना चाहती है, लिहाजा रकम में कटौती का फैसला बाद में कर सकती है।
बहरहाल, बॉरोइंग को लेकर अंतिम फैसला इस महीने के आखिर में होने वाली बैठक में लिया जा सकता है। एक सूत्र ने बताया, 'अगर उधारी की रकम में कटौती करनी है, तो स्मॉल सेविंग में कलेक्शन का ट्रेंड देखने के बाद इस बारे में फैसला किया जा सकता है। निश्चित तौर पर उधारी में 2023-24 के लिए तय की गई रकम से ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी।'
अक्टूबर 2023-मार्च 2024 के दौरान केंद्र सरकार की उधारी का एक हिस्सा ग्रीन बॉन्ड के जरिये पूरा किया जाएगा। इस बॉन्ड को पहली बार 2022-23 की पिछली तिमाही में जारी किया गया था। हालांकि, सरकार ग्रीन बॉन्ड की बिक्री से मिले प्रीमियम को लेकर संतुष्ट नहीं थी, लिहाजा वित्त वर्ष 2023-24 की दूसरी छमाही में सरकार इन बॉन्ड की नीलामी कर सकती है।
वित्त वर्ष 2023-24 में केंद्र सरकार ने ग्रीन बॉन्ड के जरिये 25,000 करोड़ रुपये जुटाने का टारगेट रखा था। सरकार ने 2022-23 में ऐसे बॉन्ड से 16,000 करोड़ रुपये जुटाए थे। हाल में इस तरह की खबरें भी आई थीं कि केंद्र सरकार 2023-24 में ग्रीन बॉन्ड जारी नहीं करने का फैसला कर सकती है।