फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने 17 दिसंबर को लोकसभा में कहा कि वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही के दौरान जीडीपी ग्रोथ में गिरावट 'तात्कालिक समस्या' है और आने वाली तिमाहियों में इसमें सुधार दिखेगा। सीतारमण ने ग्रांट को लेकर पूरक मांगों के पर हुई चर्चा के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही भारत और दुनिया की ज्यादातर अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौतीपूर्ण रही है। हालांकि, पिछले तीन साल में भारत की औसत जीडीपी ग्रोथ 8.3 पर्सेंट रही है और ग्लोबल मानकों के हिसाब से यह शानदार उपलब्धि है।
सीतारमण का कहना था कि इससे एक बार फिर इस बात की पुष्टि होती है कि भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा, ' मैं आने वाले समय में देश के आर्थिक प्रदर्शन में सुधार को लेकर आशान्वित हूं।' वित्त मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है, जब भारत की जीडीपी ग्रोथ 7 तिमाही के निचले स्तर पर पहुंच गई है। सितंबर 2024 तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ घटकर 5.4 पर्सेंट पर पहुंच गई है, जबकि जून 2024 तिमाही में यह आंकड़ा 6.7 पर्सेंट था। सीतारमण ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुस्ती व्यापक नहीं है और यह मामला कुछ सेक्टरों तक सीमित है।
इनफ्लेशन के बारे में उनका कहना था कि 2014-2024 के दौरान रिटेल इनफ्लेशन फिर से 5.1 पर्सेंट के दायरे में लाया गया, जबकि पिछली कांग्रेस की अगुवाई वाले पिछले शासन में यह डबल डिजिट का आंकड़ा पार कर गया था। उन्होंने कहा, ' केंद्र सरकार फूड इनफ्लेशन को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि कुछ फूड आइटम की कीमतों में उतार-चढ़ाव मौसम पर आधारित है।'
नवंबर में रिटेल इनफ्लेशन 5.5 पर्सेंट रहा, जबकि इससे पिछले महीने यह 14 महीने के उच्च स्तर यानी 6.2 पर्सेंट पर पहुंच गया था। नवंबर में फूड इनफ्लेशन घटकर 9 पर्सेंट हो गया, जबकि अक्टूबर में यह 10.9 पर्सेंट था।