PTC India Financial Services (PFS) ने लोन को मंजूरी देने के तय नियमों का पालन नहीं किया। उसने एक पूर्व टॉप एग्जिक्यूटिव को बहुत ज्यादा अधिकार दिए। इससे रिस्क मैनेजमेंट प्रैक्टिसेज के साथ ही उसके गवर्नेंस फ्रेमवर्क को लेकर चिंता पैदा हुई हैं। ये बातें RBI की रिपोर्ट में कही गई हैं। यह 31 मार्च, 2022 तक की RBI की रिस्क एसेसमेंट रिपोर्ट और इंस्पेक्शन रिपोर्ट है। इसे 17 अगस्त, 2023 को पीएफएस को भेजा गया था। पीएफएस पर पहले से कॉर्पोरेट गवर्नेंस के कथित उल्लंघन को लेकर रेगुलेटर की नजर है। मनीकंट्रोल ने यह रिपोर्ट यह देखी है। पीएफएस के बोर्ड में अभी इस रिपोर्ट पर चर्चा नहीं हुई है। कंपनी ने आरबीआई को अब तक यह नहीं बताया है कि कैसे वह रिस्क घटाएगी और इस रिपोर्ट में बताई गई चिंता को दूर करेगी। पीएफएस PTC India की नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी है। इसमें सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी है।
जनवरी 2022 में हुई थी विवाद की शुरुआत
PFS जनवरी 2022 से ही विवादों में है। तब कंपनी के तीन स्वतंत्र निदेशकों ने इस्तीफा दे दिए थे। उन्होंने इसकी वजह कॉर्पोरेट गवर्नेंस की कमियां बताई थी। आरबीआई की रिपोर्ट में कंपनी के कामकाज से जुड़े गंभीर मसलों के बारे में बताया गया है। SEBI, कंपनी मामलों का मंत्रालय और RBI कंपनी की खिलाफ जांच कर रहे हैं। RBI की जांच में 15 फाइल्स के सैंपल में गड़बड़ियां पाई गई हैं। इसमें बताया गया है कि कंपनी ने लोन के सैंक्शन और डिस्बर्समेंट में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उसने क्रेडिट की शर्तों की भी अनदेखी की। कुछ ग्राहकों के वैलिडेशन डॉक्युमेंट्स में पैन और आधार के बीच मिसमैच भी पाया गया है।
कंपनी ने कई नियमों की अनदेखी की
केंद्रीय बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑपरेशनल पॉलिसी, बेंचमार्क रेट्स, लोन की अवधि, बेंचमार्क रेट स्प्रेड और मिनिमम सिक्योरिटी कवरेज जैसे मामलों में भी नियमों का उल्लंघन पाया गया है। इस बारे में मनीकंट्रोल ने पीएफएस और RBI को कई सवाल भेज हैं। उनसे इन सवालों के जवाब मांगे गए हैं। लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया है। RBI ने इस मामले में ऑफसाइट एसेसमेंट किया था। सुपरवायजरी इवैल्यूएशन का भी इंस्पेक्शन किया था। इसके आधार पर कंपनी को 17 अगस्त को रिपोर्ट भेजी गई।
कंपनी को बोर्ड के समक्ष रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
RBI ने पीएफएस को 60 दिन के अंदर यह रिपोर्ट बोर्ड के समक्ष पेश करने को कहा है। इसमें रिस्क मैनेजमेंट को लेकर कई तरह की चिंता जताई गई है। केंद्रीय बैंक ने पीएफएस को यह भी बताने को कहा है कि वह समयबद्ध तरीके से किस तरह रिस्क मिटेगेशन प्लान को लागू करेगी। कंपनी के लोन में गड़बड़ी के एक मामले का पता 21 जून, 2021 को चला था। यह मामला 250 करोड़ रुपये के कॉर्पोरेट लोन का था। यह लोन 250 करोड़ रुपये की तीन किस्तों में दिया गया था। बॉरोअर के लिए फंड यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट सब्मिट करना जरूरी है। लेकिन, आरबीआई की जांच में पाया गया कि दो लोन में यह डॉक्युमेंट सब्मिट नहीं किया गया था।
लोन अकाउंट के डॉक्युमेंटेशन में भी गड़बड़ी
यह भी पाया गया है कि PFS ने बॉरोअर्स की तरफ से ऑफर किए जाने वाले एसेट्स पर सिक्योरिटी चार्जेज क्रिएट करने की टाइमलाइन में भी बदलाव किया। ऐसा बॉरोअर की रिक्वेस्ट पर किया गया। लेकिन, कंपनी की ऑपरेशनल पॉलिसी में इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा गया है। कंपनी के ऐसा करने से इस लोन के लंबे समय तक अनसेक्योर्ड रहने का अनुमान है। RBI को KYC डॉक्युमेंटेशन में भी गड़बियों का पता चला है। एक लोन अकाउंट में आधार और पैन के बीच मिसमैच पाया गया है। इससे पता चलता है कि लोन अकाउंट के जरूरी डॉक्युमेंटेशन का ध्यान कंपनी की तरफ से नहीं रखा गया।