Gadar 2 Film Review: साल 2000 में एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई थी जिसने उस जमाने में बॉक्स ऑफिस पर कमाई का नया कीर्तिमान रच दिया था। जिसे तोड़ने के लिए बॉलीवुड को सालों लगे। फिल्म का नाम था गदर। इस फिल्म को एक कल्ट स्टेटस बेझिझक दिया जा सकता है। कहानियों में सुनने को मिलता है कि उस वक्त लोग ट्रक और ट्रैक्टर में भर कर फिल्म देखने पहुंचते थे। तारा सिंह के रोल में सनी देओल, सकीना के रोल में अमीषा पटेल और अशरफ अली के किरदार में अमरीश पुरी ने इस फिल्म ने इतिहास बना दिया था। अब उसी इतिहास को गदर 2 के जरिए एक बार फिर से दोहराने का प्रयास किया गया है। फिल्म के सारे किरदार लगभग समान हैं केवल अमरीश पुरी साहब को छोड़ कर। अब ये जानने की कोशिश करते हैं अपनी इस कोशिश में यह फिल्म कितना कामयाब हो पाती है या नहीं।
गदर 2 की कहानी पहली वाली गदर से 17 आगे घटती है। तारा सिंह और सकीना अब पठानकोट में अपने बेटे जीते के साथ रहते हैं। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान का मेजर हामिद है। जो कि तारा सिंह को खत्म करना चाहता है। इन सब की जिंदगी में टर्निंग प्वाइंट तब आता है जब तारा सिंह का बेटा पाकिस्तान में फंस जाता है। अब यहीं से फिल्म की असली कहानी शुरू होती है। अपनी पत्नी सकीना को पाकिस्तान से लेकर आने वाला तारा सिंह क्या अपने बेटे को पाकिस्तान से बचा कर ला पाएगा या नहीं बस यहीं इस फिल्म की पूरी कहानी है।
कैसा है गदर 2 के कलाकारों का काम
गरद टू में इसकी पहले वाले पार्ट की तरह ही अगर कोई हीरो है तो वो हैं सनी देओल। सनी ने इस फिल्म में काफी शानदार काम किया है। गदर वाले गुस्से को उन्होंने इस फिल्म में भी काफी अच्छे से कैरी किया है। हालांकि अमीषा पटेल के हिस्से काफी कम स्क्रीन टाइम आया है और जितना आया भी है उसमें भी वो केवल रोती रहती हैं या फिर शर्माती रहती हैं। सनी देओल के बेटे बने उत्कर्ष शर्मा के हिस्से में अच्छा खासा स्क्रीन टाइम आया है। हालांकि वे कई जगहों पर ओवर एक्टिंग भी करते हुए दिखते हैं। अमरीश पुरी की जगह को भरना किसी के लिए भी नामुमकिन सा है पर फिर भी मनीष वाधवा ने खलनायक के तौर पर काफी अच्छा काम किया है।
गदर 2 का पहला पार्ट काफी अच्छा है। शुरुआत में आपको नाना पाटेकर की आवज सुनाई देती है। हालांकि इस फिल्म में गदर का भी कुछ रिफरेंस दिया गया है। पहली वाली कहानी की झलक गदर 2 में दिखती रहती है। इसके अलावा पुरानी फिल्मों के गाने को अच्छे से रिक्रिएट किया गया है। इसके लिए म्यूजिक कंपोजर मिथुन की तारीफ होनी चाहिए। साथ ही इसके डायलॉग्स भी काफी अच्छे हैं। इनको इस फिल्म की जान भी कहा जा सकता है।
गदर 2 के अगर बुरे या कमजोर पक्षों की बात करें तो वह है इसकी लंबाई। इसके अलावा फिल्म के सेकेंड पार्ट में भी आपको थोड़ा सा बोरियत महसूस हो सकती है। इसके अलावा अगर आप 23 साल के बाद इस तरह की फिल्मों को कोई लॉजिक खोजने जाएंगे तो वह भी एक तरह से बेमानी सा साबित ह सकता है।
इस बात में कोई शक नहीं है गदर 2 इससे पहले वाली गदर की सफलता को कैश करने के लिए बनाई गई फिल्म है। हालांकि इस फिल्म को एंटरटेनिंग बनाने की भरपूर कोशिश की गई है। साथ ही कोशिश इसे पहली वाली फिल्म की तरह मास सिनेमा बनाने की भी है। हालांकि यह तो दर्शकों पर है कि वे इसे मास सिनेमा के तौर पर स्वीकार करते भी हैं या नहीं। हमारी तरफ से इस फिल्म को ढाई स्टार मिलते हैं।