एक्ट्रेस नीना गुप्ता को पोती के साथ प्लेन में चेक इन से रोका गया! जानें बच्चों को लेकर क्या है नियम

नीना गुप्ता ने बताया कि उन्हें 15-20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। फिर उन्हें अपना टिकट रद्द करवाना पड़ा और शिशु के नाम पर नया टिकट खरीदना पड़ा, तभी जाकर वे चेक-इन कर सकीं। इस पूरे वाकये पर उन्होंने एक वीडियो भी बनाया

अपडेटेड Jan 25, 2025 पर 3:54 PM
एक्ट्रेस नीना गुप्ता ने वीडियो बना एक नया मुद्दा उठाया है।

Infants Travelling in a Flight : बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस नीना गुप्ता को हाल ही में अपनी 2.5 महीने की पोती मतारा के साथ प्लेन में ट्रेवलिंग के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ा। 65 वर्षीय नीना गुप्ता ने बताया कि वे अपनी पोती के साथ गोवा जा रही थीं और तभी उन्हें मतारा के लिए टिकट लेने को कहा गया। इस मामले के बाद उन्होंने एक वीडियो बनाया और कहा, एयरप्लेन में अब छोटे बच्चों के लिए टिकट बुक करना जरूरी हो गया है। हालांकि सीट नहीं मिलती, लेकिन थोड़ा फीस लिया जाता है और कुछ डॉक्यूमेंट जैसे डेट ऑफ बर्थ सर्टिफिकेट दिखाने होते हैं।

नीना गुप्ता ने उठाया ये मुद्दा

नीना गुप्ता ने आगे बताया कि, गोवा से वापसी के समय जब उन्होंने एयर इंडिया की फ्लाइट से आना था। फ्लाइट के पहले उन्हें काउंटर पर बताया गया कि उनकी छोटी पोती नहीं जा सकती क्योंकि सिस्टम के अनुसार, दो साल से कम उम्र के बच्चों को 'शिशु' माना जाता है। हालांकि उनके टिकट पर "बच्चे का उम्र और डेट ऑफ बर्थ" लिखा था, फिर भी चेक-इन नहीं करने दिया गया। उन्हें अपना पहले का टिकट कैंसिल कर नया टिकट बुक करने के लिए कहा गया। नीना ने इस मुद्दे पर सवाल उठाया कि भारत में 'शिशु' शब्द का सामान्यत: कोई उपयोग नहीं करता। हम बच्चों को छोटा या बड़ा ही कहते हैं। उन्होंने यह वीडियो युवाओं को जागरूक करने के लिए बनायी थी, ताकि वे छोटे बच्चों के साथ यात्रा करते वक्त सावधान रहें।

नीना गुप्ता ने बताया कि उन्हें 15-20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। फिर उन्हें अपना टिकट रद्द करवाना पड़ा और शिशु के नाम पर नया टिकट खरीदना पड़ा, तभी जाकर वे चेक-इन कर सके। उन्होंने यह वीडियो हाल ही में मां बनी महिलाओं के लिए बनाई, ताकि वे छोटे बच्चों के साथ यात्रा करते समय सतर्क रहें, क्योंकि ऐसा करने से कभी-कभी समस्या हो सकती है।


क्या कहते हैं एक्सपर्ट

वहीं इस मामले में पर इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए एयरलाइन एक्सपर्ट धैर्यशील वांडेकर ने बताया कि, एयरलाइंस के नियमों के मुताबिक दो साल से कम उम्र के बच्चों को शिशु माना जाता है। शिशुओं को आमतौर पर ट्रैवलिंग के दौरान माता-पिता की गोद में रखा जाता है और उन्हें अलग सीट नहीं दी जाती। क्योंकि उन्हें लगातार देखभाल की जरूरत होती है। शिशुओं से यात्रा शुल्क लिया जाता है, जो वयस्कों के किराए से कम होता है या कुछ छूट दी जाती है।

टिकट करते समय बच्चे और शिशु में समझ लें अंतर

वांडेकर के अनुसार, एयरलाइंस शिशु 'पालना' की सुविधा मुफ्त में देती हैं, लेकिन यह सुविधा उपलब्धता पर निर्भर करती है। यह सुविधा बुकिंग के समय या चेक-इन करते समय मांगी जा सकती है। दो साल से अधिक और 12 साल से कम उम्र के बच्चों को चाइल्ड टिकट दिया जाता है और उन्हें अलग सीट मिलती है। कुछ एयरलाइंस चाइल्ड टिकट पर वयस्क किराए से 20-35 प्रतिशत छूट देती हैं, जबकि कुछ में कोई छूट नहीं होती। शिशु टिकट दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए होता है, जो आमतौर पर माता-पिता की गोद में यात्रा करते हैं। चाइल्ड टिकट उन बच्चों के लिए होता है जिन्हें अपनी सीट की जरूरत होती है। इसलिए, शिशु के लिए चाइल्ड टिकट बुक करना गलत हो सकता है और इससे चेक-इन में समस्याएं आ सकती हैं। यात्रियों को यह जरूरी है कि वे शिशुओं या बच्चों के साथ यात्रा करते समय नियमों को अच्छे से समझें और यात्रा दस्तावेजों की जांच करें।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।