Renukaswamy Murder: दर्शन थूगुदीप ने हत्या के सबूत मिटाने के लिए खर्च किए 78 लाख रुपए

Renukaswamy Murder: एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि 19 जून को दर्शन के घर से 37.4 लाख रुपए मिले थे और दर्शन की पत्नी विजयलक्ष्मी के घर से और तीन लाख रुपए बरामद हुए थे। ऐसा माना जाता है कि रेनुकास्वामी की हत्या में अपने आप को बचाने के लिए दर्शन ने ये बड़ी रकम अपनी पत्नी को ट्रांसफर की थी

अपडेटेड Jun 25, 2024 पर 9:12 PM
Renukaswamy Murder: दर्शन थूगुदीप ने हत्या के सबूत मिटाने के लिए खर्च किए 78 लाख रुपए

कन्नड़ अभिनेता दर्शन थूगुदीप 33 साल के रेणुकास्वामी की नृशंस हत्या के कथित आरोप के कारण पिछले कई दिनों से सुर्खियों में हैं। कर्नाटक पुलिस लगातार नए सुराग उजागर कर रही है। एक हालिया छापेमारी में, उन्होंने 78 लाख रुपए की रकम भी बरामद की है, जिसका इस्तेमाल दर्शन और उसके साथियों ने कथित तौर पर कुछ को रिश्वत देने और मामले से जुड़े सबूतों को नष्ट करने के लिए किया था।

कर्नाटक पुलिस उस पैसे के बारे में इनकम टैक्स को बताने पर विचार कर रही है, जो दर्शन और उसके सहयोगियों के घर समेत कई ठिकानों से बरामद किया गया था।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि 19 जून को दर्शन के घर से 37.4 लाख रुपए मिले थे और दर्शन की पत्नी विजयलक्ष्मी के घर से और तीन लाख रुपए बरामद हुए थे। ऐसा माना जाता है कि रेनुकास्वामी की हत्या में अपने आप को बचाने के लिए दर्शन ने ये बड़ी रकम अपनी पत्नी को ट्रांसफर की थी।


रिश्वतखोरी और छापेमारी

आगे की जांच से पता चला कि दर्शन ने अपने दो साथियों को अपने ऊपर इल्जाम लेने और उन्हें चुप रहने के लिए 5-5 लाख रुपए दिए थे। बाद में इन व्यक्तियों से वादा किया गया कि जेल जाने के बाद उनके परिवारों को बाकी का पैसा मिलेगा।

पुलिस को इन सहयोगियों के पास से कुल 10 लाख रुपए मिले, जबकि बाकी पैसे दर्शन के करीबी दोस्त प्रदोष के घर से मिले, जो अब गिरफ्तार है।

डीसीपी गिरीश, एसीपी चंदन कुमार और पुलिस कमिश्नर बी दयानंद के साथ जांच में सबसे आगे रहे हैं। उनके अथक प्रयासों की वरिष्ठ IPS अधिकारियों ने सराहना की है, जो सच्चाई को सामने लाने के उनके दृढ़ संकल्प को उजागर करता है। सैंडलवुड इंडस्ट्री में दर्शन अच्छे खासे रसूख के बावजूद, पुलिस टीम ने उसे पकड़ने के लिए एक सीक्रेट मिशन चलाया।

हाई-प्रोफाइल मामले का खुलासा

ये हाई-प्रोफाइल मामला रेनुकास्वामी की हत्या की खोज के साथ शुरू हुआ, जिसके बाद चार दोषियों ने खुद से अपराध कबूल कर लिया, जिन्होंने शुरू में अपराध की जिम्मेदारी ली थी।

हालांकि, डीसीपी गिरीश और उनकी टीम उनके बयानों से संतुष्ट नहीं हुई और मामले की गहराई से जांच की। उन्हें पता चला कि ये चार व्यक्ति महज मोहरे थे, जिनका रेणुकास्वामी की हत्या से कोई सीधा संबंध नहीं था। इसके बाद वे एक स्थानीय होटल मालिक विनय वी के पास पहुंचे, जिन्होंने खुलासा किया कि दर्शन ने पवित्रा गौड़ा के बारे में रेणुकास्वामी की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई थी, जिसके कारण दर्शन के आदेश पर रेणुकास्वामी के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और आखिरकार उनकी हत्या कर दी गई।

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