GAIL (India) Ltd ने गुरुवार को कहा है कि यह 1,083 करोड़ रुपये के खर्च से कंपनी के करीब 5.7 करोड़ शेयरों का बायबैक करेगी। कंपनी ने कहा है कि वह शेयर धारको को फायदा पहुंचाने के लिए अपनी मजबूत बैलेंसशीट का उपयोग करेगी और इसके लिए दूसरी बार बायबैक करने की तैयारी में है। इसके पहले गेल ने 2020-21 में बायबैक पर 1,046.35 करोड़ रुपये खर्च किए थे।
कंपनी के बोर्ड ने 190 रुपये प्रति शेयर के भाव पर करीब 1,083 करोड़ रुपये के 5.70 करोड़ शेयरों के बायबैक करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। शेयरों के बायबैक का यह भाव एनएसई पर इस शेयर के बुधवार की क्लोजिंग से 24 फीसदी ऊपर है। गौरतलब है कि बायबैक को शेयर धारकों को फायदा पहुंचाने का एक कर बचाने वाला तरीका माना जाता है।
गेल में सरकार की 51.80 फीसदी हिस्सेदारी है। इस बायबैक में सरकार भी भाग ले सकती है। 2020 में सरकार ने गेल के बायबैक में शेयर टेंडर करके 747 करोड़ रुपये जुटाए थे।
जब कंपनी खुले बाजार में उपलब्ध शेयरों की संख्या को घटाने के लिए अपने बकाया शेयरों की खरीद करती है तो उसे बायबैक कहा जाता है। बायबैक को शेयर पुनर्खरीद भी कहा जाता है। कंपनी कई वजहों से शेयरों की पुनर्खरीद करती है जैसे कि आपूर्ति घटाने के द्वारा उपलब्ध शेष शेयरों की वैल्यू को बढ़ाना या कंट्रोलिंग स्टेक अर्थात नियंत्रणकारी हिस्सेदारी से दूसरे शेयरधारकों को वंचित करना। पुनर्खरीद, बकाया शेयरों की संख्या घटा देती है और इस प्रकार प्रति शेयर को आय को और अक्सर स्टॉक की वैल्यू में बढ़ोतरी कर देती है। शेयरों की पुनर्खरीद निवेशक को यह प्रदर्शित कर सकती है कि बिजनेस के पास आकस्मिकताओं के लिए पर्याप्त नकदी है और आर्थिक समस्याओं की संभाव्यता कम है।
बता दें कि वर्तमान वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान कंपनी ने अंतरिम डिविडेंड के तौर पर 3,996 करोड़ रुपये चुकाए हैं। यानी कंपनी ने इस अवधि में करीब 90 फीसदी डिविडेंड दिया है। गेल ने वित्त वर्ष 2008-09, 2016-17, 2017-18 और 2019-20 में बोनस शेयर भी दिए हैं। मार्च 2021 में इसने 150 रुपये के भाव पर 6.97 करोड़ शेयरों का बायबैक संपन्न किया था।
गेल ने 1984 में नैचुरल गैस ट्रांसमिशन कंपनी के तौर पर काम शुरू किया था। वर्तमान में यह भारत की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड नैचुरल गैस मार्केटिंग और ट्रांसमिशन कंपनी है। नैचुरल गैस के पूरे वैल्यू चेन में कंपनी की उपस्थिति है। कंपनी फर्टिलाइजर सेक्टर को उनकी 67 फीसदी खपत की सप्लाई करती है जबकि पावर सेक्टर को उसकी खपत का 53 फीसदी और सिटी गैस को उसकी खपत का 60 फीसदी सप्लाई करती है।