केंद्र सरकार शायद पेट्रोल (Petrol) और डीजल (Diesel) को GST के दायरे में ला सकती है। ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट्स में इस मामले से जुड़े लोगों के हवाले से बताया गया कि GST पर एक मंत्रिस्तरीय पैनल, एक नेशनल रेट (National Rate) के तहत पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर टैक्स लगाने पर विचार करेगा, जिससे कंज्यूमर प्राइस (Consumers Prices) और सरकारी राजस्व में संभावित बड़े बदलाव के दरवाजे खुल जाएंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, पहचान न जाहिर करने की शर्त पर इन लोगों ने बताया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाला पैनल शुक्रवार को अपनी बैठक में इस प्रस्ताव की जांच करेगा। इससे पहले एक अदालत ने इस पर विचार करने को भी कहा था। हालांकि, वित्त मंत्रालय या उसके प्रवक्ता की तरफ से इस पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
GST सिस्टम में किसी भी बदलाव के लिए पैनल के तीन-चौथाई से अप्रूवल की जरूरत होगी, जिसमें सभी राज्यों और क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। हालांकि, इनमें से कुछ ने GST सिस्टम में ईंधन को शामिल करने का विरोध किया है, क्योंकि उनका मानना है कि इससे राज्य का एक अहम राजस्व जुटाने वाला प्रोडक्ट केंद्र सरकार के हाथों में चला जाएगा।
माना जा रहा है कि ये कदम पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नरम करने में मदद करेगा, जो हाल के महीनों में केंद्रीय और राज्य सरकारों की तरफ से लगाए गए टैक्स के कारण रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी।
डीजल और गैसोलीन देश के आधे से अधिक ईंधन की खपत करते हैं। देश में ईंधन की लागत का आधे से ज्यादा हिस्सा टैक्स होता है।
CNBC-TV18 ने बताया कि पैनल शायद कुछ रिन्यूएबल उपकरणों पर GST को बढ़ाकर 12% और लौहा, तांबा और दूसरे मेटल ओर और कंसंट्रेट्स पर 18% करने पर भी विचार करेगा।