ऑटोमोबाइल, कार्बोनेटिड वाटर और तंबाकू प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने वाले लोगों को 2025-26 के आखिर तक अपनी खरीद पर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी GST चुकाना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि केंद्र सरकार ऐसे तरीके खोज रही है, जिसके जरिए वो राज्यों को अपने वादे के मुताबिक, मुआवजे देकर, उनके GST कलेक्शन में आने वाली कमी को पूरा कर सके।
15वें वित्त आयोग ने अनुमान लगाया है कि अप्रैल 2020 से जून 2022 तक के बीच राज्य जीएसटी (SGST) के कलेक्शन में 7.1 लाख करोड़ रुपये तक की कमी आ सकती है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में केंद्र के हवाले से कहा, "हमारी गणना से पता चला है कि अगर कंपनसेशन सेस को 2025 से 2026 तक बढ़ा दिया जाए, तो उससे होने वाले अनुमानित कलेक्शन से राज्यों को दी जाने वाली राशियों की पर्याप्त भरपाई होगी।"
मालूम हो कि केंद्र सरकार जीएसटी के लागू होने से आने वाली किसी भी कमी के लिए राज्यों को इस नई टैक्स स्कीम के लागू होने की तारीख से अगले पांच साल तक के लिए मुआवजा देने के लिए संविधान में किए गए संशोधन के तहत बाध्य है। इसी मुआवजे का भुगतान करने के लिए केंद्र की तरफ से चुनिंदा सामानों पर GST कंपनसेशन सेस लगाया जाता है। इसलिए इन पांच सालों के दौरान चुनिंदा वस्तुओं पर जुलाई 2017 से जून 2022 तक कंपनसेशन सेस लगाया जाना था।
रेवेन्यू कलेक्शन में कमी तब आती है, जब एक साल में SGST का वास्तविक कलेक्शन संरक्षित राजस्व (Protected Revenue) से कम होता है। जो कि 2015-16 के VAT, CST टैक्स और अन्य छोटे टैक्सों से अलग-अलग राज्यों के राजस्व पर एक अनुमानित सालाना 14 फीसदी की ग्रोथ पर आधारित था, जो बाद में SGST में शामिल हो गया।
रेवेन्यू प्रोटेक्शन का आश्वासन जून 2022 में खत्म होता है, लेकिन केंद्र उस तारीख तक भी प्रतिबद्ध मुआवजे का पूरी तरह से भुगतान करने की स्थिति में नहीं है। इसलिए उसने कंपनसेशन सेस को जून 2022 से और आगे बढ़ाने का सुझाव दिया था।
टैक्स रेवेन्यू ग्रोथ की सभी कैलकुलेशन उस आर्थिक वृद्धि के साथ खराब हो गई, जिस साल GST लागू किया गया था। ज्यादातर राज्यों में टैक्स कलेक्शन पहले साल से ही कम हो गया था, लेकिन किस्मत से केंद्र सरकार के पास 2017-18 और 2018-19 में राज्यों का बकाया देने के लिए कंपनसेशन सेस कलेक्शन पर्याप्त था। इसके बाद 2019-20 में आर्थिक वृद्धि और टैक्स क्लेकशन कम हो गया और महामारी और लॉकडाउन ने केंद्र और राज्यों की वित्तीय स्थिति को खराब कर दिया।
इन सब का परिणाम ये निकला कि न केवल एक्चुअल और एश्योर्ड कलेक्शन के बीच का अंतर बढ़ा, बल्कि कंपनसेशन सेस के कलेक्शन में भी गिरावट आई। राज्यों के बकाया न दे पाने में केंद्र की विफलता के पीछे सबसे मुख्य कारण भी यही है।
जब यह साफ हो गया कि केंद्र के सामने अनिश्चित आर्थिक परिस्थितियों में राज्यों को GST मुआवजा देने में परेशानी होगी, तब GST काउंसिल ने अपनी 5 अक्टूबर 2020 की बैठक में कंपनसेशन सेस को 2022 जून से आगे बढ़ाने का फैसला किया। इस कमी को उधार से पूरा किया जाना था। जीएसटी काउंसिल वो समयसीमा भी तय करेगी, जिसमें सेस लगाया जाएगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कहा है कि केंद्र अपने वादे का सम्मान करेगा और जब तक कि कमी की पूरी भरपाई नहीं हो जाती है, तब तक सेस लगाया जाएगा और इस पर ब्याज सहित सभी उधार चुकाए जाएंगे।
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