पुरानी पेंशन योजना को लेकर आई बड़ी खबर! सरकारी कर्मचारियों को लग सकता है झटका

Old Pension News: पुरानी पेंशन योजना (old pension system) को लेकर देशभर के कई राज्यों में काफी समय से बहस चल रही है। ज्यादातर कर्मचारी अपने राज्य की सरकारों से पुरानी पेंशन योजना लागू करने का दबाव बना रहे हैं। देश के कुछ राज्यों में पुरानी पेंशन योजना शुरू हो चुकी है। अब हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग उठने लगी है

अपडेटेड Jul 05, 2023 पर 6:55 PM
ज्यादातर कर्मचारी अपने राज्य की सरकारों से पुरानी पेंशन योजना लागू करने का दबाव बना रहे हैं।

Old Pension News: पुरानी पेंशन योजना (old pension system) को लेकर देशभर के कई राज्यों में काफी समय से बहस चल रही है। ज्यादातर कर्मचारी अपने राज्य की सरकारों से पुरानी पेंशन योजना लागू करने का दबाव बना रहे हैं। देश के कुछ राज्यों में पुरानी पेंशन योजना शुरू हो चुकी है। अब हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग उठने लगी है।

हिमाचल में उठने लगी है मांग

हिमाचल प्रदेश के इंजीनियरों और कर्मचारियों का एक संयुक्त मंच राज्य विद्युत बोर्ड (HPSEB) ने इसे लागू करने की मांग की है। कर्मचारियों ने मांग की है कि पुरानी पेंशन योजना को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। मंच ने नई पेंशन योजना का भी विरोध किया। मंच ने HPSEB ने एसेट्स को हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन(HPPCL) और हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन (HPPTCL) को ट्रांसफर करने के प्रस्ताव का भी विरोध किया है।


1.18 लाख लोगों ने चुना ओल्ड पेंशन का का ऑप्शन

हिमाचल प्रदेश में सिरफ 346 कर्मचारी ही नई पेंशन व्यवस्था यानी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में रहना चाहते हैं। वहीं, करीब 1.18 लाख कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को चुना है। यहां पर सोमवार को ओल्ड पेंशन योजना और न्यू पेंशन योजना को चुनने का आखिरी मौका कर्मचारियों को दिया गया था। 4 मई को सरकार ने हिमाचल के कर्मचारियों को 2 महीने का समय दिया था। ताकि, वह अपने लिए पेंशन योजना का चुनाव कर सकें। अब कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू किये जाने की मांग कर रहे हैं।

ये है कर्मचारियों की मांग

संयुक्त मोर्चा की हफ्ते की शुरुआत में हुई बैठक में प्रमुख मांगों के मामले में प्रस्ताव पारित किया गया है। कर्मचारियों ने अपनी मांग में कहा है कि एचपीएसईबी के एसेट्स को अलग करना न तो कर्मचारियों के हित में है और न ही बिजली ग्राहकों के हित में है।

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